फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Monsoon Session: 'बेरोजगारी दर में गिरावट का दिख रहा रुझान', विपक्ष के आरोपों पर राज्यसभा में सरकार का जवाब

Thu, 28 Jul 2022 11:18 PM IST
शिव शरण शुक्ला ब्यूरो/न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा (rajya sabha) में इस मुद्दे पर एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहा कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (plfs) के उपलब्ध आंकड़ों से संकेत मिलता है कि देश में बेरोजगारी दर (unemployment rate in india) में गिरावट हो रही है। 
विज्ञापन
रामेश्वर तेली - फोटो : ट्विटर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत में बेरोजगारी दर (Unemployment in India) पर सरकार ने मानसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान जवाब दिया है। सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में इस मुद्दे पर एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहा कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के उपलब्ध आंकड़ों से संकेत मिलता है कि देश में बेरोजगारी दर में गिरावट हो रही है। श्रम और रोजगार राज्य मंत्री रामेश्वर तेली(Rameswar Teli) ने गुरुवार को राज्यसभा में पीएलएफएस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति पर अनुमानित बेरोजगारी दर (यूआर)  2018-19 से 2020-21 के दौरान क्रमशः 5.8 प्रतिशत और 4.8 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि 2017-18 से आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण का काम सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा संचालित किया जाता है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण की अवधि अगले वर्ष जुलाई से जून है। 

विज्ञापन


सरकार ने राज्यसभा में दी जानकारी
कांग्रेस नेता अमी याजनिक के सवाल "सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार, क्या देश की बेरोजगारी दर जून में बढ़कर 7.80 प्रतिशत हो गई है, जिसमें मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में 13 मिलियन नौकरियां चली गई हैं" के जवाब में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने ये जानकारी दी है। 

राज्यसभा में जवाब देते हुए मंत्री रामेश्वर तेली ने कहा कि कई निजी कंपनियां, निकाय और अनुसंधान संगठन अपनी कार्यप्रणाली के आधार पर अलग-अलग सर्वेक्षण करते हैं। सीएमआईई उनमें से एक है। उन्होंने कहा कि रोजगार और बेरोजगारी पर आधिकारिक डेटा स्रोत आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) है।
विज्ञापन


श्रमिक जनसंख्या अनुपात और बेरोजगारी दर के आंकड़ों का दिया हवाला
उन्होंने कहा कि 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के दौरान कृषि क्षेत्र में श्रमिकों का अनुमानित प्रतिशत क्रमशः 42.5 प्रतिशत, 45.6 प्रतिशत और 46.5 प्रतिशत था, जो कृषि क्षेत्र में रोजगार की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है। इस दौरान उन्होंने 2018-19 से 2020-21 के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की सामान्य स्थिति पर अनुमानित बेरोजगारी दर (यूआर) और श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) से जुड़े आंकड़ों को भी साझा किया।

इन आंकड़ों के मुताबित, बेरोजगारी दर 2018-2019 में 5 फीसदी , 2019-2020 में 3.9 फीसदी और 2020-2021 में 3.3 फीसदी थी। वहीं, आंकड़ों के अनुसार, श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) 2018-2019 में 48.9 प्रतिशत, 2019-2020 में 53.3 प्रतिशत और 2020-2021 में 55.5 प्रतिशत था। मंत्री ने आगे कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में गिरावट हो रही है और दूसरी ओर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात में वृद्धि की प्रवृत्ति है, जो रोजगार में वृद्धि का संकेत देती है।'

रोजगार सृजन के साथ रोजगार क्षमता में सुधार सरकार की प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन के साथ रोजगार क्षमता में सुधार सरकार की प्राथमिकता है। भारत सरकार ने देश में रोजगार पैदा करने के लिए कई कदम उठाए हैं जैसे व्यापार को प्रोत्साहन प्रदान करने और कोविड 19 के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा। उन्होंने बताया कि इस पैकेज के तहत सरकार सत्ताईस लाख करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।

सरकार ने शुरू की कई योजनाएं
श्रम और रोजगार राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने कहा कि इस पैकेज में देश को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए विभिन्न दीर्घकालिक योजनाएं, कार्यक्रम और नीतियां शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इसके तहत इस वर्ष 13 जुलाई तक 59.54 लाख लाभार्थियों को लाभ पहुंचाया जा चुका है।

तेली ने कहा कि स्वरोजगार की सुविधा के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) लागू की है। पीएमएमवाई के तहत सूक्ष्म और लघु व्यवसाय उद्यमों और व्यक्तियों को अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को स्थापित करने या उनका विस्तार करने में सक्षम बनाने के लिए 10 लाख रुपये तक के संपार्श्विक-मुक्त ऋण दिए जाते हैं। इस वर्ष 8 जुलाई तक योजना के तहत 35.94 करोड़ ऋण स्वीकृत किए गए थे।

Trending Videos

समान नागरिक संहिता पर समिति का विचार नहीं
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए किसी समिति के गठन पर विचार करने से इन्कार किया। राज्यसभा में एक लिखित जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार ने विधि आयोग से समान नागरिक संहिता से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गौर करने तथा उस पर सिफारिश करने का अनुरोध किया है। उन्होंने पिछले हफ्ते लोस में कहा था देश में समान नागरिक संहिता को लागू करने को लेकर अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है क्योंकि यह मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है।

देश की तरक्की पर  चर्चा के लिए नोटिस  
राजग सांसद मनोज झा ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में  आजादी के 75 वर्षों में देश की प्रगति पर शून्यकाल में चर्चा के लिए नोटिस दिया।  नोटिस में झा ने कहा, युवा लोकतंत्र और संप्रभु धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य के तौर पर की गई प्रगति पर चिंतन करना अहम है।

पांच साल में चीन से 29 फीसदी बढ़ा आयात, 2021-22 में 115.41 अरब डॉलर पहुंचा
बीते पांच वर्ष में चीन से आयात 29 फीसदी बढ़ा है। 2017-18 के 89.71 अरब डॉलर की तुलना में 2021-22 में यह बढ़कर 115.41 अरब डॉलर पहुंच गया है। केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि चीन से आयात होने वाली प्रमुख वस्तुओं में अयस्क, अकार्बनिक व कार्बनिक रसायन, उर्वरक, रंगाई के अर्क, प्लास्टिक, कागज, कपास, कपड़े, जूते, कांच, लोहा, तांबा, परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, मशीनरी और यांत्रिक उपकरण, विद्युत मशीनरी, फर्नीचर हैं।

उन्होंने बताया कि सरकार ने 14 क्षेत्रों में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाएं शुरू की हैं, जो भारतीय निर्माताओं को विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगी। इसके अलावा इनका उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, निर्यात बढ़ाना, भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में एकीकृत करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। उन्होंने बताया कि औषधि मध्यवर्ती और सक्रिय औषधि सामग्री (एपीआई), इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, चिकित्सा उपकरणों निर्माण, प्रौद्योगिकी उत्पाद, फार्मास्युटिकल में पीएलआई योजनाएं जारी हैं।

पांच साल में विज्ञापनों पर 3,339 करोड़ रुपये खर्च
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा में कहा कि केंद्र सरकार ने 2017 से पांच साल में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापनों पर 3,339 करोड़ रुपये खर्च किए। उन्होंने कहा, प्रिंट में विज्ञापन पर 1756.48 करोड़ और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 1583.01 करोड़ रुपये खर्च किए।

योग्य उम्मीदवार न मिलने के चलते प्रसार भारती में रिक्तियां  
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा में कहा कि सरकारी प्रसारणकर्ता प्रसार भारती में शीर्ष पदों पर रिक्तियों की वजह योग्य उम्मीदवारों का न मिलना है। उन्होंने कहा कि प्रसार भारती के सीईओ प्रसार भारती (ब्रॉडकास्टिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया) कानून 1990 की धारा 8 के तहत चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे हैं।

देश में बिजली की मांग और आपूर्ति का अंतर घटा : केंद्र
ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने लोकसभा में कहा, देश में भारी मांग के बावजूद बीते माह बिजली की मांग घटकर सिर्फ 0.6 प्रतिशत ही रह गई। इससे पहले, अप्रैल में यह दो प्रतिशत थी। अप्रैल 2022 में भारत में बिजली आपूर्ति पिछले साल की तुलना में 12.8 प्रतिशत बढ़ गई थी। बिजली की मांग अप्रैल माह में 14.7 प्रतिशत बढ़ गई।  

जीएसटी और महंगाई पर चर्चा कराएं
तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने कहा है कि जीएसटी के दायरे में वृद्धि और महंगाई जैसे मसलों पर संसद में चर्चा के लिए केंद्र सरकार को आगे आना चाहिए। रामाराव ने ट्वीट किया, आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने और इसके लिए विरोध प्रदर्शन करने वाले पार्टी सांसदों की मैं सराहना करता हूं।

छह राज्यों में 31 हजार करोड़ रुपये के 221 मामलों की सीबीआई जांच लंबित
देश के छह राज्यों में करीब 31 हजार करोड़ रुपये के 221 मामलों सीबीआई जांच लंबित है। भाजपा नेता सुशील मोदी के सवाल पर केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि 30 जून, 2022 तक राज्य सरकार की सहमति नहीं मिलने की वजह से सीबीआई जांच के 221 मामले लंबित हैं। इनमें से 40 मामले करीब एक साल से ज्यादा समय से लंबित हैं, जबकि 48 मामले 6 महीने से एक साल के बीच और 133 छह महीने से कम समय से लंबित हैं। इन मामलों में शामिल कुल राशि 30,912 करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि इनमें सबसे ज्यादा 168 मामले महाराष्ट्र में, पश्चिम बंगाल में 27 मामले लंबित हैं। महाराष्ट्र के लंबित मामलों में 29,040 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल में 1,194 करोड़ रुपये शामिल हैं।
विज्ञापन

अमेरिका-ब्रिटेन से सामाजिक सुरक्षा संधि पर वार्ता :  यादव
अमेरिका और ब्रिटेन के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौते पर बातचीत जारी है। श्रम व रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को बताया, इससे अंतरराष्ट्रीय श्रमिकों व कर्मचारियों को लाभ होगा। कर्मचारियों को एक-दूसरे देश में तैनात करने पर अलग-अलग सामाजिक योजनाओं की जरूरत नहीं होगी। कर्मचारियों को भी योजनाओं के लिए दोहरा योगदान नहीं करना पड़ेगा।  बेल्जियम, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड, फिनलैंड, स्वीडन, ऑस्ट्रिया, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान से भी ऐसे समझौते किए गए हैं।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत तेजी से हासिल कर रहा सतत विकास लक्ष्य
जलवायु बदलाव और इसके प्रभावों से निपटने के लिए तय सतत विकास लक्ष्य को भारत तेजी से हासिल कर रहा है। केंद्रीय वन राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में बताया कि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के तहत बाध्यकारी दायित्व नहीं होने के बाद भी 2009 में भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता में 2016 तक 24 फीसदी की कमी कर ली थी, जबकि 2020 के लिए 25 फीसदी उत्सर्जन कटौती का लक्ष्य तय किया गया था।

उन्होंने बताया कि 2020 के लक्ष्य के बाद भारत ने पेरिस समझौते के तहत 2021-2030 की अवधि के लिए आठ राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल करने के लिए जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना लागू कर रही है।  पर्यावरण व जलवायु संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए 2009 में कोपेनहेगन में हुए सीओपी-15 के दौरान विकसित देशों ने 2020 से 2025 तक प्रतिवर्ष 100 अरब डॉलर देने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस फंड के तहत विकसित देश महज 51.8 अरब डॉलर ही जुटा पाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें