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Agriculture: कहीं इन फसलों के लिए आफत न बन जाए तेज बरसात! मूंग, उड़द और सोयाबीन की कीमतों में आ सकता है उछाल

Tue, 02 Jul 2024 08:34 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला

सार

देश में 30 मई को मानसून ने केरल में एंट्री की थी। इसके बाद एक या दो जुलाई तक देश के हर हिस्से तक पहुंच रहा है। इसी बीच मौसम विभाग ने कई राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान लगाया है। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि मूंग, उड़द, सोयाबीन और कपास की फसलों पर अत्यधिक नमी का असर पौधे के विकास और उपज को प्रभावित कर सकता है।
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फसलों पर पड़ सकता है ज्यादा बारिश का असर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के लगभग हर हिस्से में तेजी से मानसून पहुंच गया है। आने वाले दिनों में कई राज्यों में झमाझम बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच मौसम विभाग का भी अनुमान है कि आने वाले दिनों में मानसून तेजी से एक्टिव होगा। जिससे कई राज्यों में तेज बरसात होगी। इस बीच अत्यधिक बारिश के चलते दाल, सोयाबीन समेत कई फसलों के लिए नुकसानदायक होने की आशंका कृषि विशेषज्ञों द्वारा जताई जा रही है।
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दरअसल, देश में 30 मई को मानसून ने केरल में एंट्री की थी। इसके बाद एक या दो जुलाई तक देश के हर हिस्से तक पहुंच रहा है। इसी बीच मौसम विभाग ने कई राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान लगाया है। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि मूंग, उड़द, सोयाबीन और कपास की फसलों पर अत्यधिक नमी का असर पौधे के विकास और उपज को प्रभावित कर सकता है।

कृषि विशेषज्ञ आरके रमण का कहना है कि जिन किसानों ने बुआई कम बारिश के कारण देरी से शुरू की थी। उन पर अधिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। बुआई में देरी के बाद कटाई के समय या फूल आने और फल लगने के समय अत्यधिक बारिश के कारण अकसर मूंग, उड़द, सोयाबीन और कपास की फसलें खराब हो जाती हैं, जिससे उनका उत्पादन काफी कम हो जाता है।
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रमण का कहना है कि जुलाई-अगस्त में अधिक बारिश की संभावना फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। जुलाई में भारी बारिश की आशंका है, जो आम लोगों के साथ फसलों के लिए भी तकलीफ दायक साबित हो सकती है। आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि दाल की बुवाई पूरी होती है और रकबा पूरा होता है। लेकिन अच्छी बारिश नहीं होती है। जब फली सूखने का समय होता है और 6-7 दिन बारिश ज्यादा होती है, जिससे फली टूटकर गिर जाती है। जिसे उठाया नहीं जा सकता है। इससे फसल उत्पादन पर गहरा असर पड़ता है। यह समस्या खेती के समय तेज बारिश और कम बारिश के चलते होती है।

अगले पांच दिन इन राज्यों में होगी बारिश
इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले चार से पांच दिन में उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग ने कहा कि वर्तमान में कम दबाव का क्षेत्र उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर स्थित है, जो उत्तरी ओडिशा-पश्चिम बंगाल तटों के करीब है। आईएमडी ने कहा है कि पूर्वोत्तर राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश के पूर्व, उत्तर-पश्चिम में निचले क्षोभमंडल स्तर पर चक्रवाती परिसंचरण का निर्माण हुआ है। उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिम हिस्से से निम्न दबाव वाले क्षेत्र की एक प्रणाली बन गई है। आईएमडी ने कहा कि मौसम की इन प्रणालियों के कारण 29 जून से तीन जुलाई तक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने का अनुमान है।

आईएमडी ने इस अवधि के दौरान उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्यप्रदेश के अलग-अलग इलाकों में बहुत भारी वर्षा का भी अनुमान जताया है। पूर्वोत्तर में, असम के उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक चक्रवाती सर्कुलेशन अगले पांच दिन में पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में हल्की से मध्यम वर्षा, गरज के साथ बौछारें, बिजली गिरने तथा कुछ स्थानों पर भारी बारिश लाएगा। 
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