नाटक डेढ़ सौ साल पहले महात्मा गांधी के उस बाल जीवन के सफर पर दिलचस्प सफर पर ले जाता है जो राजकोट और पोरबंदर में बीता था। 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में महात्मा गांधी का जन्म हुआ था। उस वक्त उन्हें परिवार ने मोहनदास नाम दिया था लेकिन प्यार का नाम था मोनिया।
नाटक बताता है खेलकूद की उम्र से लेकर नौजवान बनने के उस दौर में ही मोनिया में महात्मा बनने के संस्कार पड़ चुके थे। यह सब कैसे हो रहा था, वो कौन सी बातें थीं, जो मोनिया को महात्मा बना रही थीं, यही इस नाटक की विषय वस्तु है। इसमें ऐसे प्रसंग है जो सहज ही हरेक को उसके बाल जीवन में ले जाते हैं।
गीत-संगीत से नाटक को रफ्तार
नाटक की बहुत बड़ी खूबी इसका गीत संगीत है। कुछ गीत खुद सीनियर टीवी जर्नलिस्ट और लेखक शकील अख्तर ने लिखे हैं, जबकि कुछ पारंपरिक गीतों का निर्देशकीय टीम ने चयन किया है। यह गीत नाटक को जोड़ने, किसी खास बात को उभारने और नाटक को गति देने का काम करते हैं।
खास बात यह भी है कि मंच पर यह गीत खुद बाल कलाकार गाते हैं। बच्चों को संगीतकार कलीम जफर ने गायन की ट्रेनिंग दी। सहयोग संगीत कलाकार नीलेश मनोहर और गगन सिंह बैस का रहा। उन्हें अपनी अनुभवी कला से बांधने का काम कैलाश चौहान ने किया।