Money laundering: केंद्रीय जांच एजेंसी ने हाल ही में आरोपी कंपनी आरकेएम पॉवरजेन प्राइवेट लिमिटेड (आरकेएमपीपीएल) और उससे जुड़े अंडाल अरुमुगम, एस अरुमुगम और अन्य के ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत छापे मारे गए।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चेन्नई स्थित एक कंपनी के खिलाफ छापे मारे। इस दौरान 1,000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। कंपनी पर छत्तीसगढ़ में कथित तौर पर 'धोखाधड़ी' से कोयला ब्लॉक हासिल करने का आरोप है। ईडी ने मंगलवार को कहा कि छापे के दौरान 912 करोड़ रुपये मूल्य की सावधि जमा रसीदें (एफडीआर) और म्यूचुअल फंड जब्त किए गए। साथ ही अचल संपत्तियों से संबंधित अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए। कुल जब्त संपत्ति की कीमत करीब 1,000 करोड़ रुपये है।
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केंद्रीय जांच एजेंसी ने हाल ही में आरोपी कंपनी आरकेएम पॉवरजेन प्राइवेट लिमिटेड (आरकेएमपीपीएल) और उससे जुड़े अंडाल अरुमुगम, एस अरुमुगम और अन्य के ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत छापे मारे गए। मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सीबीआई के एक केस पर आधारित है। इसमें आरोपियों पर छत्तीसगढ़ में फतेहपुर ईस्ट कोल ब्लॉक को धोखाधड़ी से हासिल करने का आरोप लगाया गया था, जिसे कोयला मंत्रालय ने बिजली क्षेत्र के लिए आवंटित किया था।
आरोप है कि आरकेएमपीपीएल ने कोयला ब्लॉक आवंटन के आधार पर पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) से कर्ज हासिल किया। इस कर्ज का 3,800 करोड़ के कर्ज का एक अहम हिस्सा एमआईपीपी नामक एक विदेशी संस्था को स्थानांतरित किया गया।
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एजेंसी ने कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन के बाद आरकेएमपीपीएल ने 240 रुपये प्रति शेयर के प्रीमियम पर अपने 26 प्रतिशत शेयर मलेशिया आधारित मुदजया कॉर्पोरेशन बीएचडी को और 10.95 प्रतिशत शेयर एनर्क इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड को सौंप दिए।लेकिन इसके उलट आरकेएमपीपीएल को अंकित मूल्य पर 63.05 प्रतिशत शेयर आवंटित किए गए थे। मूल्यांकन पद्धति में पारदर्शिता की कमी थी और निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं रखा गया।
एजेंसी ने कहा कि यह पाया गया कि मुदजया कॉरपोरेशन ने अपनी सहायक कंपनी एमआईआईपी इंटरनेशनल से उपकरण खरीद के लिए पीएफसी-स्वीकृत धनराशि की फिर से वापसी के जरिए अपने 240 रुपये प्रति शेयर प्रीमियम का वित्त पोषण किया। इसने दावा किया कि अनुमानित तौर पर इक्विटी भागीदारी की आड़ में विदेशी संस्थाओं के माध्यम से व्यवस्थित रूप से 1,800 करोड़ रुपये आरकेएमपीपीएल को वापस भेज दिए गए।