स्पेशल कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक को घर का खाना खाने की इजाजत दे दी है। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि मलिक से पूछताछ के दौरान उनके वकील मौजूद रह सकते हैं। गौरतलब है कि मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किए गए महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने गुरुवार को एक याचिका दाखिल कर ईडी की हिरासत में रहते हुए घर का खाना और दवाइयों की मांग की थी। उनकी इस याचिका को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के विशेष न्यायाधीश आर एन रोकाडे ने मंजूर कर लिया।
अदालत ने उनके वकील को पूछताछ के दौरान मौजूद रहने की भी अनुमति दी। अदालत ने कहा कि मलिक की वकील भूमिका गडा को दूर से उपस्थित रहने की अनुमति है। वह पूछताछ के दौरान आरोपी के साथ कोई परामर्श नहीं करेगी। साथ ही जांच में वकील द्वारा किसी भी तरह से कोई हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
एनसीपी के वरिष्ठ नेता मलिक से बुधवार को ईडी ने भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों की गतिविधियों से जुड़े एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब पांच घंटे की पूछताछ की थी। इसके बाद मलिक को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया गया था।
ईडी का मामला भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और अन्य के खिलाफ हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। एनआईए ने गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज की थी।
नवाब मलिक की गिरफ्तारी के बाद एनसीपी सुप्रीमों शरद पवार ने उनके बचाव में कहा था कि मलिक को इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज बुलंद की है। पवार ने कहा कि हमें आशंका थी कि इस प्रकार की कार्रवाई की जा सकती है क्योंकि मलिक खुल कर बोलते हैं। पवार ने कहा कि सीधी सी बात है। अगर कोई मुस्लिम कार्यकर्ता होता है तो उसे दाऊद इब्राहिम से जोड़ दिया जाता हैं। जबकि उसका अंडरवर्ल्ड से कोई संबंध नहीं होता लेकिन ऐसा किया जाता है।
नवाब मलिक की गिरफ़्तारी पर महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि दाऊद जैसे देश के दुश्मन को मदद जिसके माध्यम से हुई उसको और उनका मंत्री पद बचाने के लिए पूरी सरकार (महाराष्ट्र सरकार) उनके पीछे खड़ी है, इसका देश को जवाब इस सरकार को देना पड़ेगा।