ब्रिटेन ने सबसे पहले कोरोना के इलाज के लिए मर्क की मोल्नुपिराविर पिल को मंजूरी दी।
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कोरोनावायरस से होने वाली गंभीर बीमारी और अस्पताल में दाखिले की संभावना को कम करने वाली कोरोना रोधी दवा मोल्नुपिराविर को भारत में मंजूरी मिल चुकी है। लेकिन अब तक इसके इस्तेमाल को लेकर कोई गाइडलाइंस जारी नहीं हुई हैं। इस बीच NTAGI के कोरोनावायरस वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष डॉक्टर एनके अरोड़ा ने कहा है कि मोल्नुपिराविर को बुजुर्ग नागरिकों को दिया जा सकता है। खासकर पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों (कोमॉर्बिडिटी वाले बुजुर्गों) को। हालांकि, इसी के साथ उन्होंने एक चेतावनी भी जारी की। डॉक्टर अरोड़ा ने कहा कि प्रजनन की उम्र में चल रहे लोगों को यह दवा नहीं दी जानी चाहिए।
मोल्नुपिराविर पर एम्स के डॉक्टरों ने भी जताया है संदेश
मर्क की मोल्नुपिराविर दवा को करीब 13 कंपनियां बना रही हैं। हाल ही में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दवा को कोविड उपचार के लिए आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति भी दी थी। लेकिन डॉक्टरों ने लोगों को चेताया है कि अगर इस दवा का इस्तेमाल अपने मन से करेंगे तो इसके फायदे कम नुकसान ज्यादा होंगे।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव का यहां तक कहना है कि यह दवा काफी गंभीर परिणाम दे सकती है। इस दवा को तभी लें जब डॉक्टर की निगरानी में उपचार चल रहा हो अन्यथा इसके जोखिम बहुत अधिक हैं।
दिल्ली एम्स के वरिष्ठ डॉ. नीरज निश्चल ने भी लोगों को सचेत किया है कि अगर इस दवा का इस्तेमाल बगैर चिकित्सीय निगरानी में हुआ तो इससे शरीर पर कई गंभीर असर पड़ेंगे। यह दवा पुरुषों के रीप्रोडक्टिव सेल, बोन और कार्टिलेज और बोनमैरो को भी प्रभावित कर सकता है। इससे कैंसर तक लोगों में हो सकता है।