सनाउल्लाह को 2008 में मिला था नागरिकता साबित करने का नोटिस
उच्च न्यायालय ने विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) के उस आदेश को खारिज नहीं किया है जिसमें सनाउल्लाह को विदेशी घोषित किया गया था। अदालत का कहना है कि याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी। चूंकि सनाउल्लाह को विदेशी घोषित किया गया है और एफटी के आदेश के खिलाफ उनकी अपील गुवाहाटी उच्च न्यायालय में लंबित है इसी कारण न तो उनका और न ही उनके बच्चों के नाम अंतिम सूची में शामिल हैं।
एनआरसी के प्रावधानों के अनुसार जिन लोगों को एफटी ने विदेशी घोषित किया है उनके या उनके बच्चों के नाम एनआरसी की अंतिम सूची में शामिल नहीं हो सकते हैं। 52 साल के सनाउल्लाह भारतीय सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। 1987 में वह सेना में शामिल हुए थे। असम सरकार के अधिकारी चंद्रमल दास ने एक जांच रिपोर्ट तैयार की थी जिसने सनाउल्ला को विदेशी करार दिया था।
दास की जांच रिपोर्ट के आधार पर सनाउल्लाह को 2008 में अपनी नागरिकता साबित करने के लिए नोटिस दिया गया था। वह 2018 में एफटी के समक्ष पेश हुए जहां से उन्हें 23 मई को विदेशी घोषित कर दिया गया। इसके बाद उन्हें गोपालपारा में स्थित डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया था। हालांकि सनाउल्लाह के डिटेंशन सेंटर में जाने की खबर पता चलने पर दास जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं उन्होंने कहा कि अपनी रिपोर्ट में जिस शख्स को उन्होंने मजदूर करार देते हुए बांग्लादेश में जन्मा बताया था वह डिटेंशन सेंटर में भेजा गया व्यक्ति नहीं है।