पीएम नरेंद्र मोदी की छवि एक हिंदूवादी नेता की रही है, लेकिन अक्तूबर में उन्होंने अपनी भगवा पार्टी की विचारधारा के विपरीत मुस्लिम महिलाओं के जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री ने एलान किया कि देश की मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाना सरकार और जनता की जिम्मेदारी है। पीएम के इस रुख से स्पष्ट है कि भाजपा यूपी चुनाव में इस मुद्दे को भुनाकर मुस्लिम वोटों को बांटना चाहेगी।
तीन तलाक का मुद्दा गरमाने के बाद कुछ मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि वह मोदी के विचार का समर्थन करती हैं, लेकिन वे बहुत ज्यादा आश्वस्त नहीं हैं। इस मुद्दे पर मोदी सरकार का जोरदार विरोध भी हो रहा है। प्रभावशाली मुस्लिम नेता और धर्मगुरु इसके खिलाफ उतर आए हैं। दारुल उलूम देवबंद मदरसा के वाइस चांसलर अबुल कासिम नोमानी ने इसे इस्लाम और मुस्लिमों पर हमला करार दिया है।
उनका कहना है कि इस्लाम के खिलाफ इस लड़ाई में मुस्लिम महिलाओं का उपयोग शोपीस के रूप में किया जा रहा है। नोमानी के पास बैठे मदरसा के एक अधिकारी ने बड़बड़ाते हुए कहा कि मोदी सरकार का यह प्रयास भेड़िये द्वारा बकरी के अधिकारी की बात करने जैसा है। वैसे इस मुद्दे पर मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने के मिल रही है। यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देश में तीन तलाक पर रोक है तो फिर भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता।
चुनाव प्रचार के दौरान तीन तलाक का मुद्दा उठाएगी भाजपा
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मोदी के सार्वजनिक राजनीति करिअॅर की शुरुआत वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में हुई थी। कुछ महीनों बाद ही वर्ष 2002 में गुजरात में दंगे हुए, जिसमें करीब 1000 लोग मारे गए। मारे गए लोगों में अधिकांश मुस्लिम थे।
ऐसे में मोदी पर आरोप लगा कि दंगे के दौरान हत्या और बलात्कार की घटनाओं पर वह आंखें मूंदे रहे। बहरहाल, मोदी ने 2002 में दंगों में अपनी भागीदारी से इनकार किया था। वर्ष 2014 में मोदी केंद्र की सत्ता में आए। इसके बाद कट्टरवादी हिंदू समूहों द्वारा बड़े पैमाने पर मुस्लिमों के धर्म परिवर्तन की कोशिश होने लगी। दिनदहाड़े मुस्लिमों की पिटाई और उत्पीड़न की घटनाएं भी बढ़ गईं।
अब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने इस्लामिक परंपरा ‘तीन तलाक’ को चुनौती दी है। इस परंपरा के तहत एक मुस्लिम पुरुष को अधिकार है कि वह अपनी पत्नी को सिर्फ तीन बार तलाक कह कर छोड़ सकता है। भाजपा की ओर से तीन तलाक के मुद्दे को उठाए जाने को मुस्लिम महिलाओं का वोट हासिल करने के लिए चला गया एक निर्भीक चाल के रूप में देखा जा रहा है।
भारत में मुस्लिमों की संख्या करीब 17 करोड़ है, जो अब तक मोदी को संदेह की नजर से देखता रहा है। इस मुद्दे पर भाजपा अपनी पहुंच किस स्तर तक बना पाती है, इसका अगले साल के आरंभ में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव पर पड़ना तय है।
यूपी की जनसंख्या 20 करोड़ है और इसमें मुस्लिमों की संख्या करीब 4 करोड़ है। 2019 में दूसरी बार केंद्र की सत्ता हासिल करने की तैयारी में जुटे मोदी के लिए यूपी विधानसभा चुनाव को सेमीफाइनल मैच के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा और उसके सहयोगी संगठन तीन तलाक के मुद्दे को जोरशोर से उठा रहे हैं। वे इस मुद्दे के जरिये समाज में बढ़ते इस्लामिक प्रभाव पर रोक लगाने की जरूरत पर बल देने के साथ ही मुस्लिम मतदाताओं को बांटना चाहते हैं। वैसे अभी यह कहना काफी मुश्किल है कि तीन तलाक के मुद्दे को उठाने का यूपी चुनाव में भाजपा को कितना लाभ मिलेगा।