प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गरीबों के लिए ऊर्जा के साधन सस्ते तो होने ही चाहिए, उसका स्वच्छ होना भी बहुत जरूरी है। इसके साथ ही इनकी निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित करनी होगी। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भारत की विकास दर के अनुमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जहां विकास दर बढ़ी है, वहीं महंगाई की दर भी काबू में रहती है। लेकिन विकास की प्रमुख जरूरत ऊर्जा है और जब भारत तेज गति से विकास करेगा, तो यहां ऊर्जा की मांग भी सबसे ज्यादा होगी।
ऊर्जा खपत 4.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले 25 सालों तक भारत में ऊर्जा की खपत 4.5 फीसदी की सालाना दर से बढ़ेगी। देश मे ऊर्जा के भविष्य को लेकर उनका नजरिया चार खंभों पर टिका है। ये हैं ऊर्जा तक पहुंच (एनर्जी एक्सेस), ऊर्जा की उपयोगिता (एनर्जी इफिशियंसी), ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति (एनर्जी सस्टेनेबिलिटी) और ऊर्जा सुरक्षा (एनर्जी सिक्योरिटी)। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ऊर्जा के एकीकरण में ही नहीं, बल्कि देश के सभी निवासियों तक ऊर्जा के साधन पहुंचाने की सोच में विश्वास रखती है और इसी दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।