ममता-केजरीवाल भी बिगड़े
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी इसे लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे खतरनाक बताते हुए मुद्दे पर जनता की राय मांगी है। उन्होंने लिखा- मुझे पता चला है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कल एक आदेश जारी कर 10 केंद्रीय एजेंसियों को कंप्यूटर पर किसी भी सृजित, प्रेषित, प्राप्त या भंडारित सूचना को देखने, उनकी निगरानी करने और ‘डिक्रिप्शन’ करने के लिए अधिकृत किया है। अगर यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए है, तब भी उसके लिए केंद्र सरकार के पास पहले से ही तंत्र है। लेकिन सभी आम लोग क्यों प्रभावित हो? लोग अपनी राय दें।
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा- 'मई 2014 से भारत अघोषित इमरजेंसी के दौर से गुजर रहा है। नागरिकों के कंप्यूटर पर निगरानी के फैसले से मोदी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। क्या दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अधिकारों का ऐसे हनन होगा।'
ओवैसी-येचुरी ने उठाए सवाल
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी इस फैसले को लेकर भड़के हुए हैं। उन्होंने मोदी सरकार को निशाने पर लेते हुए जासूसी कराने का आरोप लगाया है। ओवैसी ने आदेश की कॉपी ट्वीट करते हुए कहा- मोदी ने राष्ट्रीय एजेंसियों को हमारे कम्युनिकेशन की जासूसी का आदेश दे दिया है। किसे पता था कि घर घर मोदी नारे का यह मतलब था। जॉर्ज ऑर्गवेल के बड़े भाई यहां हैं और 1984 में आपका स्वागत है।
वहीं सीपीएम ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। माकपा पोलित ब्यूरो और पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने निजी कंप्यूटरों को भी जांच एजेंसियों की निगरानी के दायरे में लाने के सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए सवाल किया कि सरकार हर भारतीय को अपराधी क्यों मान रही है?
येचुरी ने गृह मंत्रालय के 10 केंद्रीय एजेंसियों को सभी कंप्यूटरों पर निगरानी करने संबंधी आदेश को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा ‘प्रत्येक भारतीय के साथ अपराधी की तरह व्यवहार क्यों किया जा रहा है? यह आदेश असंवैधानिक है। यह सरकार द्वारा पारित किया गया है जो हर भारतीय पर निगरानी रखना चाहती है।’
क्या है केंद्र का आदेश
बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए 10 खुफिया एजेंसियों को कंप्यूटरों के डाटा जांचने का अधिकार दे दिया है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 के तहत अगर एजेंसियों को किसी भी संस्थान या व्यक्ति पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का शक होता है तो वे उनके कंप्यूटरों में मौजूद सामग्रियों को जांच सकती हैं और उन पर कार्रवाई कर सकती हैं।