रायटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज पर अपनी रेटिंग अपग्रेड करने के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया था लेकिन सरकार की यह कोशिश सफल नहीं हो पाई। रेटिंग एजेंसी ने साफ कर दिया कि पिछले दो सालों में ऐसा कोई काम नहीं हुआ है जिसके चलते रेटिंग बढ़ाई जाए। हालांकि सरकार ने भी एजेंसी के रेटिंग मैथड़ पर सवाल उठाते हुए इसे अस्पष्ट बताया है।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार अंतराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर रेटिंग पाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में काफी प्रयास किया गया जिससे विदेशी निवेश को आकृषित किया जा सके।
साल 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए में मुद्रास्फीति नीचे रखने और राजकोषीय घाटे और चालू खाते को कम करने के लिए काफी कदम उठाए हैं। लेकिन इसका भी कोई खास असर नहीं दिखाई दिया है। यही कारण है कि शीर्ष तीन ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने भारत की रेटिंग में कोई सुधार नहीं किया।