द ग्रेट इंडिया रिवोल्यूशनर्स, लाइफ पीसफुल पार्टी, मिनिस्ट्रियल सिस्टम अबोलिशियन पार्टी और भारतीय संताजी पार्टी, सुनने में नाम बड़े अजीब लगें लेकिन ये नाम उन पार्टियों के हैं जो चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड हैं।
चुनाव आयोग ने अब ऐसी 200 से ज्यादा पार्टियों की मान्यता रद करने की तैयारी कर ली है जिन्हें कई सालों से कोई चुनाव नहीं लड़ा है। आयोग का मानना है ऐसी पार्टियां कालेधन को सफेद करने के काम में भी लगी हैं।
वहीं मीडिया में इन पार्टियों के नाम सामने आए तो इनकी खोज पड़ताल शुरू हुई जिसके बाद सामने आई अजीब अजीब कहानियां। मसलन, किसी पार्टी ने अपने रजिस्टर्ड दफ्तर के रूप में जिस जगह का परिचय दिया है वहां कोई ऑफिस ही नहीं है।
कई जगह लोगों ने दूसरों के घरों को ही पार्टी का दफ्तर बताकर उसका रजिस्ट्रेशन करा दिया है। कुछ पार्टियां तो ऐसी भी हैं जिन्होंने रजिस्टर्ड कार्यालय के रूप में देश के गृहमंत्री के आवास का ही पता दे दिया।
आयोग ने जारी की 255 पार्टियों की लिस्ट
- फोटो : अमर उजाला
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार चुनाव आयोग ने अब ऐसी 255 पार्टियों का नामांकन रद करने की तैयारी कर ली है जिन्होंने साल 2005 और 2015 के आम चुनावों में कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है। ऐसी पार्टियों ने अपने पते भी अजीबोगरीब दिए हैं।
जैसे आल इंडिया प्रोग्रेसिव जनता दल ने आयोग में जो अपना रजिस्टर्ड पता दिया है वो 17 अकबर रोड, नई दिल्ली है जो केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह का सरकारी आवास है।
इसके अलावा पवित्र हिंदुस्तान काझगम पार्टी ने 11 हरीश चंद्र माथुर लेन नई दिल्ली का जो पता दिया है वो असल में जम्मू कश्मीर सीआईडी का ऑफिस है।
इन पार्टियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीबीडीटी को लिखा
लिस्ट में राष्ट्रीय मातृभूमि नाम की पार्टी का पता तो गुडगांव की उस तीन मंजिला इमारत का दिया गया है जहां एक होम्योपैथिक डॉक्टर प्रैक्टिस करते हैं। उन्होंने बताया कि 9 सदस्यों वाली उनकी पार्टी को पांच-छह साल पहले धनाभाव के कारण बंद कर दिया गया था।
आयोग द्वारा जारी 255 पार्टियों की लिस्ट में सबसे ज्यादा (52) पार्टियां दिल्ली के पते पर रजिस्टर्ड हैं तो उत्तर प्रदेश में (41), तमिलनाडु में (39) और महाराष्ट्र में (24) पार्टियां रजिस्टर्ड हैं।
चुनाव आयोग ने यह लिस्ट बुधवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) को भेजते हुए जरूरी कार्रवाई के लिए कहा है। आयोग ने यह भी कहा है कि इस बात की जांच की जाए कि ये पार्टियां लंबे समय से टैक्स में छूट का फायदा तो नहीं ले रही हैं।