प्रधानमंत्री मोदी की सरकार आठ साल के कार्यकाल और कामकाज के लिए अपनी थपथपा रही है। इसके जवाब में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के आठ साल के कामकाज को 8 बड़ा छल बताया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन कहते हैं कि हम तो विपक्ष हैं। अपनी भूमिका निभा रहे हैं। सवाल तो पूछेंगे। प्रधानमंत्री बताएं कि कहां गया उनका मंहगाई भगाने, युवाओं को रोजगार देने और देश की जनता के अच्छे दिन लाने का वादा। मोदी सरकार के 8 साल की समीक्षा करते हुए मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला कहते हैं कि 8 साल, 8 छल, मोदी सरकार विफल। यह तो बस जुमले की सरकार है और अब नारा बदलकर सत्ता के लिए नफरत को बढ़ावा दे रही है।
संघ के एक पदाधिकारी ने कहा कि आठ साल के कामकाज पर वह क्या बोलें? इसे देश की जनता अब खुद ही महसूस कर रही है। प्रधानमंत्री ने देश की जनता को उसका गौरव दिलाया है। सूत्र का कहना है कि उन्होंने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा दिया है। इसे आप कैसे झुठला सकते हैं। आज सड़कें बन रही हैं। गांवों में बिजली, स्वच्छ पेय जल है। देश की बहुसंख्यक आबादी भी देश में अपना समुचित सम्मान पा रही है। सूत्र का कहना है कि आप खुद मुड़कर पीछे देख लीजिए, राजनीतिक सोच की पूरी धारा बदल गई है। अब हिंदी, हिंदू, हिंदुत्व के हितों की बात करने में कोई संकोच नहीं होता। राष्ट्रीयता की भावना मजबूत आधार पा रही है।
जब बात एक झटके में 500-1000 के नोट बंद करने (विमुद्रीकरण) और नोटों के रंग बदलने के फायदे के बारे में पूछने पर कोई जवाब नहीं मिलता। कृषि मंत्रालय के अधिकारी भी अब तीनों कृषि कानूनों की वापसी और किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री के वादे पर कोई चर्चा नहीं करना चाहते। गृह मंत्रालय के अधिकारी सीएए और एनआरसी को लेकर भी अभी किसी तरह की चर्चा की पक्ष में नहीं हैं। हां, कानून मंत्रालय अगले चरण के कानूनी प्रावधानों में जरूर व्यस्त है। रेल मंत्रालय अभी कोरोना काल के दौरान रफ्तार खो चुकी भारतीय रेल को पटरी पर लाने की तैयारी कर रहा है।
कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी सरकार के आठ साल पूरे होने पर मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला, वरिष्ठ नेता अजय माकन ने पक्ष रखा। सुरजेवाला ने कहा- "मंहगे दिन, नौकरी बिन। अर्श से फर्श, अर्थ व्यवस्था के आठ वर्ष। आमदनी हुई न दोगुना, दर्द सौ गुना। विकास से नहीं नाता, बस नफरत फैलाना आता। राष्ट्रीय सुरक्षा पर आंच, मोदी सरकार ने बंद की आंख।"