मरीज के भर्ती होने से लेकर उसे मुहैया कराए गए इलाज की निगरानी के चार चरण होंगे। पहला मुहैया करायी गई सेवाओं को परखा जाएगा, मरीज को दिए गए इलाज की जरूरत, दस्तावेज और रिपोर्ट का सत्यापन और अंतिम दौर में अस्पताल द्वारा वसूली जा रही दरों की जांच की जाएगी। इसके बाद पूरी गतिविधि का रिकॉर्ड सुरक्षित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मरीज को केंद्रीय पोर्टल के साथ राज्य, जिला और क्षेत्रीय स्तर पर शिकायत की व्यवस्था मुहैया होगी। हरेक शिकायत पर बाकयदा रिपोर्ट तैयार होगी जिसे केंद्रीय अधिकारी भी जब चाहे देख सकेंगे और आगे की कार्यवाही कर सकेंगे। डॉ.पॉल ने कहा कि जिन राज्यों में ट्रस्ट मॉडल है, वहां तो हरेक अस्पताल के भुगतान के लिए स्वास्थ्य विभाग क्षेत्रीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है।
संयुक्त मॉडल में छोटे भुगतान यानी 50 हजार तक की जिम्मेदारी बीमा कंपनियों पर है और बड़े में ट्रस्ट मॉडल है। इसके अलावा दो राज्य, जिन्होंने बीमा कंपनियों को जिम्मेदारी दी है। वहां सेवाओं और इलाज की जरूरत पर निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में तकनीक के जरिए धांधली रोकने का आसान तंत्र मौजूद है। दुनिया में अब तक 10 करोड़ से अधिक परिवारों के लिए एकसाथ स्वास्थ्य बीमा योजना नहीं लायी गई थी। भविष्य में यह मील का पत्थर साबित होगी।