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तकनीक के जरिए आयुष्मान भारत में सेंधमारी रोकेगी सरकार, भर्ती से लेकर अस्पताल से छुट्टी तक रखेंगे नजर

Sun, 23 Sep 2018 03:13 AM IST
पीयूष पांडेय, नई दिल्ली
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10 करोड़ से अधिक परिवारों के लिए रविवार से शुरू होने वाली योजना आयुष्मान भारत में सेंधमारी रोकने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। नीति आयोग के सदस्य डॉ बीके पॉल के मुताबिक अस्पतालों की धांधली रोकने का हल केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर तकनीक के जरिए निकाला है।

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उन्होंने कहा कि तीस से भी ज्यादा तंत्र निगरानी के लिए हैं, जिनके जरिए अस्पताल द्वारा वसूली गई दरों, दस्तावेज-रिपोर्ट के सत्यापन, मरीज को दिए गए इलाज की जरूरत और मुहैया करायी गई सेवाओं की निगरानी की जाएगी। 

नीति आयोग द्वारा तैयार की गई योजना को सरकार 23 सितंबर से लागू करने में राज्यों की भूमिका पर डॉ.पॉल ने कहा कि अस्पतालों को पैनल में लाना, स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराने का मॉडल अपनाना और क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी तंत्र प्रदेश सरकारों ने ही तैयार किया है।
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योजना में 20 राज्यों ने ट्रस्ट मॉडल, 4 ने संयुक्त मॉडल यानी 50 हजार तक के दावे का भुगतान की जिम्मेदारी को सौंपा जाना और शेष ने बीमा कंपनियों का मॉडल अपनाया है। जबकि चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश इसमें शामिल होना शेष हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र के एकीकृत पोर्टल के अलावा राज्य सरकारों के पास तकनीकी तंत्र हैं। यह सारी व्यवस्थाएं, उन सेंधमारियों को रोकने के लिए की गई हैं जो विभिन्न स्तरों पर हो सकती हैं।

नीति आयोग के सदस्य ने कहा मान लीजिए योजना के तहत भर्ती किए गए मरीज को वह सेवा नहीं मुहैया करायी जाती, जिसका मूल्य अस्पताल द्वारा लिया गया है या लिया जाने वाला है। इन परिस्थितियों के लिए औचक निरीक्षण की व्यवस्था की गई है जबकि हर मामले में भुगतान से पहले दस्तावेजों और रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। इनकी अधिकृत सॉफ्ट कॉपी सुरक्षित रखी जाएगी। 

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4 चरणों में होगी इलाज की निगरानी

मरीज के भर्ती होने से लेकर उसे मुहैया कराए गए इलाज की निगरानी के चार चरण होंगे। पहला मुहैया करायी गई सेवाओं को परखा जाएगा, मरीज को दिए गए इलाज की जरूरत, दस्तावेज और रिपोर्ट का सत्यापन और अंतिम दौर में अस्पताल द्वारा वसूली जा रही दरों की जांच की जाएगी। इसके बाद पूरी गतिविधि का रिकॉर्ड सुरक्षित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि मरीज को केंद्रीय पोर्टल के साथ राज्य, जिला और क्षेत्रीय स्तर पर शिकायत की व्यवस्था मुहैया होगी। हरेक शिकायत पर बाकयदा रिपोर्ट तैयार होगी जिसे केंद्रीय अधिकारी भी जब चाहे देख सकेंगे और आगे की कार्यवाही कर सकेंगे। डॉ.पॉल ने कहा कि जिन राज्यों में ट्रस्ट मॉडल है, वहां तो हरेक अस्पताल के भुगतान के लिए स्वास्थ्य विभाग क्षेत्रीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। 

संयुक्त मॉडल में छोटे भुगतान यानी 50 हजार तक की जिम्मेदारी बीमा कंपनियों पर है और बड़े में ट्रस्ट मॉडल है। इसके अलावा दो राज्य, जिन्होंने बीमा कंपनियों को जिम्मेदारी दी है। वहां सेवाओं और इलाज की जरूरत पर निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में तकनीक के जरिए धांधली रोकने का आसान तंत्र मौजूद है। दुनिया में अब तक 10 करोड़ से अधिक परिवारों के लिए एकसाथ स्वास्थ्य बीमा योजना नहीं लायी गई थी। भविष्य में यह मील का पत्थर साबित होगी। 
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