पाकिस्तान में इमरान खान के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद भारत की निगाहें पड़ोसी मुल्क की भारत नीति पर जमी हुई है। भारत को लगता है कि अन्य नई सरकारों की तरह इमरान सरकार भी दोनों देशों के बीच नए सिरे से बातचीत का रास्ता टटोलेगी।
हालांकि आम चुनाव सिर पर होने के कारण मोदी सरकार बिना किसी ठोस पहल के पाकिस्तान के प्रति नरमी दिखाने के मूड में नहीं है। हां, अगर नई सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ भारतीय रुख के अनुरूप कोई बड़ा कदम उठाया तो बातचीत की खिड़की खुलने का रास्ता तैयार हो सकता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक फिलहाल भारत को पाकिस्तान की नई सरकार के आधिकारिक रुख का इंतजार है। पहले उम्मीद थी कि नए पीएम इमरान अपने शपथ ग्रहण समारोह से ही इस संबंध में पाकिस्तान के भावी रुख की ओर इशारा करेंगे।
हालांकि ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि नए पीएम ने इस समारोह के जरिए कोई संदेश न देने की योजना पर काम किया। यही कारण है कि भारत नई सरकार के भावी रुख पर सतर्क निगाह रख रहा है। भारत पहले नई सरकार का आतंकवाद और भारत के प्रति रुख को अच्छी तरह से भांप लेना चाहता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलने की दिशा में आगे बढने की राह फिलहाल बेहद कठिन है। चूंकि भारत में अगले साल ही आम चुनाव होने हैं। ऐसे में मोदी सरकार बिना किसी ठोस पहल के अपना दिल बड़ा करने या पाकिस्तान को बिना किसी ठोस पहल के एक बार फिर से आजमाने की स्थिति में नहीं है।
हां, अगर पाकिस्तान ने खासतौर पर आतंकवाद के खिलाफ भारतीय रुख और मांग के अनुरूप कोई ठोस कदम उठाया तो भारत सकारात्मक जवाब दे सकता है। हालांकि जिस प्रकार सेना से नई सरकार की नजदीकी है और इमरान की पार्टी में आतंकवादियों से सहानुभूति रखने वाले कई लोग चुनाव जीत कर आए हैं, उससे नई सरकार की ओर से तत्काल बड़ी कार्रवाई की उम्मीद नहीं के बराबर है।
कूटनीति में बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं होते- सलमान हैदर
पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर का कहना है कि कूटनीति में बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं होते। इसके लिए हमेशा पिछला दरवाजा खुला रहता है। खासतौर से नई सरकार के गठन के बाद पिछले दरवाजे से संभावना तलाशी जाती है। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि दोनों देशों की ओर से कुछ सार्थक कदम उठाए जाएंगे।