नरेंद्र मोदी सरकार न्यायाधीशों की जवाबदेही तय करना चाहती है। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार न्यायिक जवाबदेही विधेयक में कामकाज के आकलन संबंधी प्रावधान जोड़ने के बाद इसे फिर से लाने की तैयारी कर रही है। यह विधेयक संप्रग सरकार के समय लाया गया था। तब विधेयक में न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक व्यवस्था बनाने की पैरवी की गई थी।
नए विधेयक की रूपरेखा इस साल फरवरी में न्याय प्रदान करने और विधि सुधार करने के राष्ट्रीय मिशन की सलाहकार परिषद की बैठक में चर्चा के लिए लाई गई थी। बैठक में अधिकारियों ने कहा कि यह महसूस किया गया कि देश में न्यायिक जवाबदेही की जरूरत को न्यायिक आचार और न्यायिक कदाचार से संबंधित मुद्दों तक सीमित किया जा रहा है।
अगर न्यायिक गुणवत्ता की की बात की जाएगी तो इसका दायरा बढ़ सकता है। ऐसे में देश की कानूनी प्रक्रियाओं को और प्रभावशाली और पारदर्शी बनाने के लिए न्यायाधीशों की जवाबदेही तय किया जाना जरूरी है। सरकार के सूत्रों ने कहा कि जब विधेयक को व्यापक चर्चा के लिए लाया जाएगा तो उच्च न्यायपालिका में कामकाज के अलावा रिपोर्ट पर भी विचार विमर्श होगा।