सरकार ने कनाडा की एक कंपनी को बाल के उपचार से जुड़े एक मेडिकल फार्मूला का पेटेंट देने से इनकार कर दिया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी के आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि यह फार्मूला पारंपरिक भारतीय औषधियों का हिस्सा है।
कनाडाई कंपनी आइलैंड लैबोरेटरीज ने इस बाबत पेटेंट डिजाइन एवं ट्रेडमार्क कंट्रोलर जनरल के ऑफिस में 2007 में आवेदन किया था। कंपनी ने बालों में वृद्धि, केश और सिर की त्वचा में सुधार के दावे के साथ औषधीय मिश्रण के एक फार्मूला का पेटेंट मांगा था। इस फार्मूले को वेरेट्रम, बक्सस और होलार्हेना जैसे विभिन्न औषधीय पौधों के सत को मिलाकर तैयार किया था, जिससे बालों का गिरना कम होता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन सीएसआईआर की शाखा ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (टीकेडीएल) ने इस आवेदन को चुनौती दी थी।
टीकेडीएल की अगुआई कर रहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक अर्चना शुक्ला ने कहा कि कनाडाई कंपनी को पेटेेंट नहीं दिया गया है क्योंकि संस्थान ने अनेक संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि उक्त औषधीय पौधों के सत का इस्तेमाल बालों के इलाज के लिए सदियों से पारंपरिक भारतीय औषधि के रूप में होता रहा है। लिहाजा कनाडाई कंपनी को पेटेंट देना सही नहीं है।