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दाल मिलें ही कर सकेंगी विदेशों से दालों की खरीद, मोदी सरकार ने नियमों को किया सख्त

Sun, 13 May 2018 02:38 AM IST
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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घरेलू बाजार में दालों की कीमतों में स्थिरता लाने के लिए सरकार ने आयात के नियमों को सख्त कर दिया है। अब विदेशों से दालों की खरीद सिर्फ दाल मिलें ही कर सकेंगी। उन्हें तय मात्रा में तुअर, मूंग और उड़द का आयात करना होगा। वाणिज्य मंत्रालय ने यह निर्णय किसानों को राहत पहुंचाने के मद्देनजर किया है।    

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सरकार ने आदेश में दालों के आयात के लिए कोटा सिस्टम लागू किया है। इसमें मिलों को आयात के लिए सरकार से मंजूरी लेनी होगी जिसके लिए उन्हें 12 से 25 मई के दौरान अपनी क्षमता के मुताबिक आवेदन करना होगा। एक जून को सरकार योग्य आवेदन के लिए अधिसूचना जारी करेगी। मिलों को 31 अगस्त तक निर्धारित कोटे के तहत आयात पूरा करना होगा। 

वाणिज्य मंत्रालय के विदेशी व्यापार महानिदेशालय ने हालांकि यह भी कहा है कि मिलों को आयात पर साप्ताहिक रिपोर्ट प्रक्रिया के दौरान देनी होगी। दालों के आयात के लिए मिलें अधिकतम दो मिट्रिक टन तुअर, डेढ़ मिट्रिक टन उड़द और उतना ही मूंग मंगाने का आवेदन कर सकती हैं। याद रहे कि सरकार ने गतवर्ष अगस्त में दालों के आयात की मात्रा निर्धारित कर दी थी। इसमें उड़द और मूंग 3 लाख टन जबकि तुअर का आयात 2 लाख टन तय किया गया।
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वाणिज्य मंत्रालय देश में दालों की रिकॉर्ड पैदावार और किसानों को एमएसपी के अनुरूप कीमत मुहैया कराए जाने के मद्देनजर लगातार आयात पर नजर बनाए हुए है। वर्ष 2017-18 में 23.95 मिलियन टन दालों की पैदावार हुई जबकि इसके पिछले वर्ष में उपज 23.1 मिलियन टन थी। मौजूदा समय अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू बाजार में दालों की कीमतों में भारी अंतर है। 

दालों की एमएसपी की तुलना में आयातित दालें सस्ती हैं जिसके चलते किसानों को बाजार में उतनी कीमत भी नहीं मिल पा रही है जो लागत और मेहनत के अनुरूप हो। इसके चलते सरकार लागातर आयात के नियमों में बदलाव और सख्ती कर रही है। इसके बावजूद तुअर का दाम एमएसपी से 20 फीसदी नीचे चला गया है और यही हाल अन्य दालों का भी है। यही वजह है कि सरकार ने आयात में सिर्फ दाल मिलों को ही मंजूरी दी है। 
  
गौरतलब है कि देश में तुअर दाल का आयात अप्रैल-नवंबर, 2017 में 404,000 टन हुआ था। जबकि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में सरकार ने दो लाख टन की सीमा तय कर दी थी। दअसल ऐसा सीमा तय किए जाने के बाद नियमों में ढील देने और आयात संबंधित समझौते में आंशिक व पूर्ण भुगतान के चलते हुआ। हालांकि सरकार ने ऐसी तमाम कमियों को अब दूर कर लिया है और लगातार उठाए जा रहे कदमों से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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