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मोदी सरकार ने पहली बार नहीं किया यह काम, 1978 में भी बंद हो चुका है 1000 का नोट

Wed, 09 Nov 2016 11:08 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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एक हजार का नाोट
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बड़े नोटों का चलन बंद करना कोई नई बात नहीं है। 1000 रुपये के नोट का चलन पहली बार जनवरी 1946 में और फिर 1978 में बंद किया गया था। उस समय भी यह फैसला कालेधन और उससे चल रही समानांतर अर्थव्यवस्था को रोकने के लिए किया गया था। आपातकाल के बाद के दौर में कालेधन का प्रयोग काफी प्रासंगिक हो चला था। इस फैसले को लागू करने के लिए हाइ डेमोमिनेशन बैंक नोट ऐक्ट 1978 नाम से कानून बनाया गया था। भारतीय रिजर्व बैंक ने 1938 और 1954 में सबसे बड़ा नोट 10,000 रुपये का छापा था।
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रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 1000 रुपये के नोट का चलन नवंबर 2000 में शुरू किया गया था जबकि 500 रुपये का नोट बाजार में अक्तूबर 1987 में आया था। यह कदम बढ़ती महंगाई को देखते हुए उठाया गया था। हालांकि पहली बार 2000 रुपये का नोट शुरू करने की घोषणा की गई है। 10 रुपये के नोटों की शृंखला में पहली बार अशोक स्तंभ का वाटरमार्क 1967 और 1992 के दौरान चलन में लाया गया था जबकि 20 रुपये के नोट पर 1972, 50 रुपये के नोट पर 1975 और 100 रुपये के नोट पर यह चिह्न 1967-1979 के दौरान चलन में था।

सन 1980 में पहली बार नोटों पर राष्ट्रीय चिह्न के नीचे सत्यमेव जयते लिखने का चलन आया। अक्तूबर 1987 में 500 रुपये के नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर और अशोक स्तंभ वाटरमार्क अंकित किया गया। महात्मा गांधी शृंखला के बैंक नोट 1996 रुपये में अस्तित्व में आए। नवंबर 2001 में 5 रुपये, जून 1996 में 10 रुपये, अगस्त 2001 में 20 रुपये, मार्च 1997 में 50 रुपये, जून 1996 में 100 रुपये, अक्तूबर 1997 में 500 रुपये तथा नवंबर 2000 में 1,000 रुपये के नोटों पर ये चिह्न अंकित किए गए। महात्मा गांधी सीरीज-2005 के नोट भी इन्हीं मूल्यों की मुद्राओं पर जारी किए गए।
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