केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को अपने उस निर्णय का बचाव सुप्रीम कोर्ट के सामने किया, जिसमें मोबाइल कनेक्शन को आधार नंबर के साथ जोड़ने के लिए कहा गया है।
केंद्र ने कहा कि यदि मोबाइल नंबरों का इसके जरिए सत्यापन नहीं किया गया तो ये अदालत के ही पूर्व में दिए निर्णय की अवमानना हो सकती थी। हालांकि शीर्ष न्यायालय ने इसे अपने निर्णय की गलत व्याख्या बताते हुए कहा कि सरकार निर्णय को मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए आधार को अनिवार्य बनाने के लिए औजार बना रही है।
दरअसल आधार और इसे लागू करने वाले 2016 के कानून के खिलाफ याचिकाओं के ढेर की सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक पीठ के सामने बृहस्पतिवार को अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सरकार का पक्ष रखा।
इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी सिम कार्ड उपभोक्ताओं का सत्यापन एक साल के अंदर करने का आदेश शीर्ष न्यायालय ने ही 6 फरवरी, 2017 को केंद्र सरकार को दिया था।