राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सामाजिक चेनता के जरिए समरता को धार देने में जुट गया है। भंते संघप्रिय राहुल के जरिए दलितों में चेतना जगाने की अलख जारी है। भारतीय बौद्ध संघ के बैनर तले भंते संघप्रिय राहुल इसके लिए नये सिरे कार्यक्रम की योजना बना रहे हैं।
सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. सत्यनारायन जटिया इसके मुख्य संरक्षक हैं। माना यह जा रहा है कि संघ और भाजपा के साथ-साथ दलितों में चेतना जगाना केन्द्र सरकार के भी प्रमुख एजेंडे में है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 14 अप्रैल को नागपुर जाने का कार्यक्रम हैं।
नागपुर में प्रधानमंत्री बाबा साहब भीमराव अबेंडकर के सम्मान में उनकी दीक्षाभूमि में आयोजित कार्य कार्यक्रम में शरीक होंगे। सूत्र बताते हैं कि दलितों में चेतना तथा उनको संघ और भारतीय जनता पार्टी से जोडऩे के लिए बड़े पैमाने पर कार्य योजना तैयार हो रही है।
गांव-गांव में अंबेडकर को याद किया जाएगा
बाबा साहेब अंबेडकर
14 अप्रैल को किसान मोर्चा भी गांव-गांव में अंबेडकर को याद करेगा। इस दौरान मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों को बाबा साहब की नीतियों के अनुरुप बताने की कोशिश होगी। नोटबंदी, उज्वला योजना, जनता के हाथ में सब्सिडी का स्थानांतरण समेत अन्य मुद्दों के जरिए आम जनता में जागरुकता अभियान चलाने की पहल होगी।
इससे पहले डा. सत्यनारायन जटिया की देखरेख में 25 मार्च को एक कार्यक्रम नई दिल्ली में भी आयोजित हो चुका है। इस कार्यक्रम में खुद सर संघ चालक मोहन भागवत भी आए थे। संघ प्रमुख ने इस क्रम में सामाजिक न्याय और समरसता को आगे बढ़ाने के लिए जागरुकता फैलाने का आह्वान किया था।
इस संदर्भ में डा. सत्यनारायन जटिया का कहना है कि भारतीय बौद्ध संघ देश में समरता और सामाजिक न्याय की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित करने की रुपरेखा तैयार की जा रही है। ताकि लोगों को समभाव के संस्कार को विकसित किया जा सके। इसे केन्द्र में रखकर 14 अप्रैल को दिल्ली में भी एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
डा. जटिया का कहना है कि अंबेडकर दलितों में चेतना का प्रतीक थे। इसलिए अंबेडकर जयंती के दिन हर गांव, बस्ती, ब्लाक और जिला स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इसे लेकर भाजपा भी संवेदनशील है। हालांकि जटिया का कहना है कि वह 14 अप्रैल को दिल्ली में ही रहेंगे।
गांधी, पटेल के बाद अंबेडकर
संघ और भाजपा की इस मुहिम को सामाजिक चेतना के साथ-साथ राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने के रूप में भी देखा जा रहा है। पहले संघ और भाजपा राष्ट्रपति महात्मा गांधी को लेकर संयत रहती थी, लेकिन मई 2014 में नई सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस छुआछूत को पूरी तरह से खत्म कर दिया।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और सरदार पटेल को लेकर देश भर में संदेश फैलाने के साथ-साथ बाबाराम भीमराव अंबेडकर को सम्मान देकर सरकार सबका साथ, सबका विकास के एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ा रही है।