अफसरशाही के घिसे पिटे तरीके पर नाराजगी जता चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन में यहां तक कह दिया था कि सरकार क्या बाबुओं के भरोसे ही चलेगी? लेकिन उसी मोदी सरकार ने अपने मंत्रिमंडल में छह पूर्व अफसरशाहों को जगह दी है।
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पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी और मौजूदा ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आरके सिंह को नए मंत्रिमंडल में बतौर कैबिनेट मंत्री प्रमोशन दिया गया है। इसी तरह शहरी विकास और उड्डयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद संभाल रहे हरदीप सिंह पुरी को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। पुरी भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी रह चुके हैं।
पूर्व विदेश सचिव (आईएफएस) एस जयशंकर बतौर विदेश मंत्री मंत्रिमंडल में कायम हैं जिन्हें मोदी सरकार के विदेश नीति का मुख्य स्तंभ माना जाता है। ताजा मंत्रिपरिषद विस्तार में दो और पूर्व आईएएस अधिकारियों को जगह दी गई है। इनमें जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के आरसीपी सिंह और भाजपा के अश्वनी वैष्णव शामिल हैं। वैष्णव ने 1999 में ओडिशा में आए तूफान में अपनी सूझबूझ से लाखों लोगों की जान बचाई थी।
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वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में उन्होंने पीपीपी मॉडल शुरू कराने का श्रेय वैष्णय को ही जाता है। तूफान के बाद के प्रबंधन के सराहनीय काम के बाद उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्र बुला लिया गया था। सेवानिवृत्त होने के बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे।
आरसीपी सिंह ने बतौर आईएएस बिहार में कई सेक्टर में सराहनीय काम किया। वह नितीश सरकार में बिहार के मुख्य सचिव भी रहे। बाद में वह जदयू में शामिल हो गए। 2019 में मोदी सरकार में शामिल हुए पूर्व आईएएस अधिकारी सोम प्रकाश लो प्रोफाइल रहते हुए उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो नए विस्तार में कम से कम दो और पूर्व अफसरशाह को शामिल किया जाना था। लेकिन आखिर वक्त में फैसला बदल दिया गया।