भारत के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णनन की जन्मस्थली तिरुत्तनी में भाजपा सुब्रह्मण्यम स्वामी और नरेंद्र मोदी के सहारे कमल खिलाने की कोशिश कर रही है। यह सुब्रह्मण्यम स्वामी भाजपा के नेता नहीं, बल्कि भगवान शिव के पुत्र भगवान स्वामी कार्तिक हैं, जिन्हें तमिलनाडु समेत पूरे दक्षिण भारत में इसी नाम या मुरुगन स्वामी और अप्पा स्वामी के नाम से जाना जाता है। प्रदेश भाजपा के नेता दिलीप कुमार को उम्मीद है कि इस धार्मिक नगरी में कमल खिल सकता है।
तिरुत्तनी में पिछले चुनाव में एआईडीएमके के साथ गठबंधन करके तमिल सुपर स्टार रहे विजय कांत की पार्टी डीएमडीके ने यह सीट जीती थी, लेकिन इस बार यहां डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की तरफ से पार्टी को कड़ी चुनौती मिल रही है।
भाजपा भी यहां मजबूती से चुनाव लड़कर मुकाबले को तिकोना बनाने की कोशिश में है। पार्टी ने स्थानीय व्यवसायी चक्रवर्ती नायडू को अपना उम्मीदवार बनाया है। आंध्र प्रदेश की सीमा से सटे इस इलाके में तेलुगू भाषी लोगों की बहुतायत है। भाजपा उम्मीदवार भी तेलुगू भाषी हैं।
सोमवार को जिस तरह सड़कों पर उनके समर्थन में लोग निकले, उससे भाजपा को यहां अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। तमिलनाडु चुनाव के प्रभारी भाजपा महासचिव मुरलीधर राव कहते हैं कि नतीजे जो भी हों, लेकिन इस बार तमिलनाडु की राजनीति में भाजपा एक ताकत के रूप में उभरेगी। हालांकि यहां लोग भाजपा को कम, मोदी को ज्यादा जानते हैं।
पिछले कई चुनावों में जयललिता को वोट देने वाले नागभूषण कहते हैं कि इस बार वह कमल पर मुहर लगाएंगे। यह पूछने पर कि कमल किसका निशान है नागभूषण का जवाब होता है मोदी का। वह कहते हैं कि उन्हें लगता है कि नरेंद्र मोदी के पास लोगों के लिए कई अच्छी योजनाएं हैं, इसलिए इस बार उन्हें मौका मिलना चाहिए।
नतीजे कुछ भी हों लेकिन कम से कम प्रचार अभियान में भाजपा ने तिरुत्तनी समेत पूरे तमिलनाडु में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।