कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहे भारतीयों को अमेरिकी कंपनियों के कोरोना टीकों का लाभ फिलहाल नहीं मिलने जा रहा है।
सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि एक खुराक वाला कोरोना टीका बनाने वाली मॉडर्ना के भारतीय बाजार में अगले साल ही पहुंच पाने की संभावना है, जबकि एक अन्य अमेरिकी दिग्गज कंपनी फाइजर इंक ने कुछ नियामकीय छूट मिलने पर इसी साल 5 करोड़ टीके देने की बात कही है। इन छूट में टीके से हानि पहुंचने पर कंपनी को मुआवजा चुकाने के लिए मजबूर नहीं करने का वादा भी शामिल है।
जॉनसन एंड जॉनसन के पास भी फिलहाल अतिरिक्त टीके उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इस कंपनी की तरफ से भी निकट भविष्य में अमेरिका के अलावा भारत या अन्य किसी देश को टीका दे पाने की संभावना बेहद कम है।
सूत्रों ने बताया कि मॉडर्ना कंपनी फिलहाल भारत में अपने टीके की उपलब्धता को लेकर सिपला और कई अन्य भारतीय कंपनियों के साथ बात कर रही है। मॉडर्ना ने साल 2021 में भारत को देने के लिए अपने पास अतिरिक्त टीके नहीं होने की जानकारी केंद्र सरकार को दे दी है।
हालांकि सिपला ने मॉडर्ना से 2022 में पांच करोड़ टीकों की खरीद का समझौता किया है और इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है। सिपला के आवेदन का समर्थन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी किया है, लेकिन अब तक केंद्र सरकार ने इस पर निर्णय नहीं लिया है।
सूत्रों के मुताबिक, फाइजर इंक इसी साल जुलाई-अगस्त में 1-1 करोड़ टीके, 2 करोड़ सितंबर में और बाकी एक करोड़ टीके अक्तूबर में भारत को देगी। कंपनी इन टीकों के लिए किसी भारतीय कंपनी या राज्य सरकार को नहीं बल्कि केवल भारत सरकार से ही सौदा करेगी। लेकिन कंपनी की तरफ से मांगी गई नियामकीय छूट आड़े आ रही है।
हालांकि केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय समिति की बैठक में एक अधिकारी ने बताया है कि टीके से हानि पर मुआवजा नहीं देने की छूट के लिए फाइजर अब तक अमेरिका समेत 116 देशों के साथ समझौता कर चुकी है।
विश्व स्तर पर फाइजर की अब तक 14.7 करोड़ खुराक उपयोग हो चुकी हैं और कहीं भी बुरे प्रभाव की सूचना नहीं है। सूत्रों का कहना है कि फाइजर की इस मांग पर फैसले के लिए नेगवैक (कोविड-19 टीका प्रबंधन पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह) की बैठक बुलाई जा सकती है।
बढ़ रही है चिंता, एक सप्ताह में दो बार उच्च स्तरीय बैठक
सूत्रों का कहना है कि वैश्विक और घरेलू बाजार में टीकों की उपलब्धता को लेकर कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में पिछले सप्ताह दो बार उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है, जिसमें कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के प्रभाव और मौजूदा समय में टीकों की सप्लाई व आवश्यकता के बीच बढ़ते अंतर को देखते हुए तत्काल टीका खरीद की आवश्यकता मानी गई है।
हालांकि इन दोनों ही बैठक में कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। अभी तक देश में ‘मेड इन इंडिया’ कोरोना टीकों ‘कोविशील्ड’ व ‘कोवैक्सीन’ की बदौलत 20 करोड़ से ज्यादा खुराक आम जनता को दी जा चुकी है, जबकि रूस की स्पुतनिक-5 भी आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी पा चुकी है और उसका उत्पादन भी भारत में शुरू हो गया है। लेकिन देश की आबादी के बड़े आकार को देखते हुए इन तीनों ही टीकों का उत्पादन स्तर बेहद कम आंका जा रहा है।