Naxal Affected Area, Chattisgrah
- फोटो : Amar Ujala
टावर लगते ही यूं बदला जीवन
इन इलाकों में नक्सली मोबाइल टावर नहीं लगाने दे रहे थे। जो कोई टावर लगता, उसे जला दिया जाता था। कई बार टावर को गिराने या दूसरे तरीके से उसे नुकसान पहुंचाने का प्रयास होता था। सीआरपीएफ ने मोर्चा संभाला। हर टावर पर जवान तैनात किए गए। नई साइटों की सुरक्षा भी अपने नियंत्रण में ली।
नतीजा, जंगल में मोबाइल फोन पहुंच गया। गांवों में लोगों ने नेट कनेक्शन भी ले लिया। जिनके बच्चे पहले स्कूल जाते ही नहीं थे, अब वे 'आश्रम' यानी हॉस्टल में पढ़ रहे हैं। सीओ अम्ब्रेश कुमार के अनुसार, मां बाप को कोई चिंता नहीं रहती, क्योंकि वे मोबाइल फोन पर उनसे बात कर लेते हैं।
वीडियो कॉलिंग की सुविधा आने के बाद वे बच्चों को अपने पास कम ही बुलाते हैं। निश्चित तौर पर नक्सल प्रभावित इलाकों में ये एक बड़ी क्रांति है। हमारे जवान अपनी लैब में ग्रामीण बच्चों को कंप्यूटर व लैपटॉप पर पढ़ाते हैं। जिस अफसर के पास समय होता है, वह बच्चों के साथ आईटी की जानकारी साझा करता है।
मोबाइल फोन आने के बाद लोग अब बुनियादी सुविधाओं की बात करने लगे हैं। वे जिला प्रशासन के अधिकारियों के पास अपनी समस्या भेज देते हैं। टेली मेडिसिन योजना अब इन इलाकों में बड़े पैमाने पर सफल हो रही है। कृषि एवं दूसरे कार्य भी अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गए हैं।
दूसरे चरण में लगेंगे 2217 मोबाइल टावर, 2000 डाकघर खुलेंगे...
नक्सल प्रभावित इलाकों की जिंदगी में आगे बड़ा बदलाव आना तय है। केंद्र सरकार ने यहां के लिए 2217 मोबाइल टावर स्वीकृत किए हैं। इसके अलावा इन इलाकों में दो हजार डाकघर भी खुलेंगे। गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री जी.किशन रेड्डी का कहना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष केंद्रीय सहायता दी जा रही है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन में एक बदलावा आया है। वामपंथी उग्रवाद की हिंसा में कमी आई है। 2009 में वामपंथी उग्रवाद हिंसा की घटनाएं 2258 के स्तर से 70 फीसदी घट कर 2019 में 670 हो गई हैं। सुरक्षाबल और आम नागरिकों की मौत का आंकड़ा देखें तो 2010 में सर्वाधिक 1005 के स्तर से 80 फीसदी घटकर वर्ष 2019 में 202 हो गई हैं।
नक्सली मोबाइल इस्तेमाल न करने की धमकी देते हैं
सीआरपीएफ अधिकारी के अनुसार, मोबाइल टावर लगने के बाद नक्सली अब बौखलाने लगे हैं। वे लोगों को धमकी देते हैं कि यदि उन्होंने मोबाइल फोन अपने पास रखा तो उसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। वजह, नक्सली समझते हैं कि एक बार इन लोगों को यदि बाहरी दुनिया और खुद में भेद नजर आ गया तो वे फिर उनकी बातों में नहीं आएंगे।
वहीं नक्सलियों में अभी नई भर्ती को लेकर संकट पैदा हो गया है। ग्रामीण अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दूसरे इलाकों में भेजने लगे हैं। ऐसे में नक्सलियों को युवा नहीं मिल रहे। टावर लगने के बाद सीआरपीएफ जवानों को भी सुविधा हासिल हुई है। अब वे अपने घर-परिवार को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं। वीडियो कॉलिंग से अपने परिवार का हालचाल जान लेते हैं।