राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
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लॉकडाउन अवधि के दौरान बिजली कंपनियों द्वारा ग्राहकों को भारी भरकम बिल भेजे गए। इसको लेकर ठाकरे सरकार ने बिल में छूट देने का वादा भी किया। लेकिन अचानक अडानी ने एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से मुलाकात की और फिर सरकार ने बिजली बिल माफी के मुद्दे पर यू-टर्न ले लिया।
शनिवार को मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने बिजली बिल के मुद्दे पर महाविकास आघाड़ी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिजली के बिल भेजे गए। इसको लेकर मनसे ने आंदोलन किया। बिल माफी के लिए वे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिले। इसके बाद वे शरद पवार से भी मिले। लेकिन कुछ ही दिन बाद पता चला कि अडानी आकर शरद पवार से मिले। उसके बाद सरकार बिजली बिल माफी के वादे से मुकर गई।
बता दें कि भाजपा ने लॉकडाउन में बिजली बिल माफी और बिजली कनेक्शन काटने के खिलाफ शुक्रवार को राज्यभर में आंदोलन किया था। लेकिन राज ठाकरे का दावा है कि सबसे पहले मनसे के कार्यकर्ताओं ने बिजली बिल माफी को लेकर आंदोलन शुरू किया था।
सात साल पुराने मामले में राज ठाकरे को मिली जमानत
मनसे प्रमुख राज ठाकरे शनिवार को सात साल पुराने के एक मामले में नवी मुंबई के वाशी-बेलापुर नगर दीवानी कोर्ट में हाजिर हुए। जनवरी 2014 में राज ने टोल नाके पर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर लोगों से टोल नहीं देने के लिए कहा था।
इसके बाद मुंबई और नवी मुंबई को जोड़ने वाले वाशी टोलनाके पर मनसे कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की थी। इस मामले में कोर्ट ने राज को हाजिर होने के लिए समन जारी किया था। राज के वकील राजेंद्र शिरोडकर ने कहा कि उन्हें 15 हजार के निजी मुचलके पर जमानत मिली है। अगली सुनवाई पांच मई को होगी।