केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को तीनों कृषि कानूनों पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा, कुछ लोग कहते थे कि मनरेगा केवल गड्ढों वाली योजना है। हमने कांग्रेस के गड्ढे भरे हैं।
मनरेगा में गड्ढे ही खोदने का काम होता था, लेकिन अब यही योजना केंद्र सरकार के साथ पूरे देश के लिए गर्व का सबब बन गई है। योजना की शुरुआत आपने की, मगर हमले इसे परिष्कृत किया। आज मजदूरों के खाते में सीधा पैसा जाता है। 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को मनरेगा में रोजगार मिल रहा है।
तोमर ने उच्च सदन में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा, 2020 चुनौती भरा साल रहा है। अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराएं, लेकिन मुझे देश के लोकतंत्र पर और नागरिकों व किसानों पर गर्व है।
उन्होंने लॉकडाउन के बावजूद अपना विश्वास नहीं खोया। उन्होंने किसानों के लिए किए गए सरकार के कामों को गिनाते हुए कहा, गांव, गरीब और किसान मोदी सरकार की प्राथमिकता है और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है, क्योंकि प्रधानमंत्री कहते हैं कि जब तक गांव तक पैसा नहीं पहुंचेगा तब तक विकास नहीं होगा।
उन्होंने कहा, सरकार किसानो का आमदनी बढ़ाने के लिए काम कर रही है। कृषि सुधार बिल इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पीएम मोदी किसानों के लिए समर्पित हैं और रहेंगे। देश आगे बढ़े, गांव आगे बढ़े और किसान आगे बढ़े इसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सरकार काम कर रही है।
मोदी सरकार ने देश की तस्वीर बदली, यह कहने में गुरेज नहीं
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष द्वारा मोदी सरकार द्वारा हर बात का क्रेडिट लेने के संदर्भ लेते हुए कहा, यह आरोप तथ्यहीन है। 15 अगस्त को सेंट्रल हॉल में अपने पहले भाषण में ही पूर्व सरकारों के देश निर्माण में योगदान का जिक्र किया था। नरेंद्र मोदी सरकार ने देश की तस्वीर को बदला है, यह कहने में गुरेज नहीं है।
रजिस्ट्रेशन के साथ ही बढे़गा सम्मान निधि का बजट
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के बजट में हुई कटौती को लेकर तोमर ने कहा, अभी तक 10 करोड़ के आसपास किसानों ने पंजीकरण कराया है।
यही कारण है कि मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से ही बजट की व्यवस्था की गई है। जैसे ही रजिस्ट्रेशन बढ़ेगा, तुरंत उसका बजट भी बढ़ा दिया जाएगा। किसान की आमदनी दोगुनी हो इसके लिए मोदी सरकार लगातार काम कर रही है। इसमें पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत हर साल छह हजार रुपये सीधे किसानों के खाते में दिए जा रहे हैं।