डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने सोमवार को चेन्नई के मरीना बीच के पास फोरशोर एस्टेट में नया सचिवालय और विधानसभा परिसर बनाने के टीवीके सरकार के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।
पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि भीड़भाड़ वाले इलाके में नया सचिवालय बनाने की जरूरत नहीं है। इसके लिए मछुआरों की रोजी-रोटी और उनके आसपास के इलाके को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा परिसर मुख्यमंत्री के काम करने के लिए होता है, समुद्र देखने के लिए नहीं।
स्टालिन की चेतावनी- कुचल देंगे टीवीके का अहंकार
स्टालिन ने एक बयान में अपने दल की ओर से उन मछुआरों के विरोध को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया, जो अपने इलाके में इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम उन मछुआरों के विरोध को अपना पूरा समर्थन देंगे, जो अपने इलाके में इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।"
स्टालिन ने कहा, "हम टीवीके सरकार के अहंकार को कुचल देंगे, जिसने अपने समर्थन में खड़ी पार्टियों के विरोध के बावजूद नया सचिवालय भवन बनाने का सरकारी आदेश वापस नहीं लिया है।" सीपीआई (एम), जो सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है, ने भी समुद्र तट के पास प्रस्तावित योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। पार्टी ने कहा है कि इस परियोजना से मछुआरों पर गंभीर असर पड़ेगा और पर्यावरण की संवेदनशीलता को देखते हुए भी यह चिंता का विषय है।
फैसले के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
फोरशोर एस्टेट में नया सचिवालय परिसर बनाने की टीवीके सरकार की योजना के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में सरकार के प्रस्ताव पर रोक लगाने और नए सचिवालय के निर्माण की योजना को पूरी तरह समाप्त करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
चेन्नई के अधिवक्ता आरएस तमिलवेंदान की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य कथित तौर पर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। ऐसे समय में नए सचिवालय के निर्माण पर 1,200 करोड़ रुपये खर्च करने से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। याचिकाकर्ता के मुताबिक, मौजूदा सचिवालय भवन का नवीनीकरण कर इस खर्च और करदाताओं के पैसे को बचाया जा सकता है।
याचिका में की गई क्या मांग?
याचिका में यह भी कहा गया है कि नए सचिवालय के लिए प्रस्तावित क्षेत्र पहले से ही भीड़भाड़ वाला है। ऐसे में बड़े परिसर का निर्माण होने से यातायात की समस्या और बढ़ सकती है तथा जाम की स्थिति पैदा हो सकती है। याचिकाकर्ता ने कहा कि मौजूदा सचिवालय फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर में संचालित होता है, जो एमजीआर चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन के नजदीक है। ऐसे में सचिवालय को पट्टिनापक्कम स्थानांतरित करने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने 12 सितंबर को सरकार के समक्ष अपनी आपत्ति और मांग रखी थी, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट से अंतरिम आदेश जारी कर संबंधित अधिकारियों को नए सचिवालय परिसर के निर्माण से रोकने की मांग की है।