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Tamil Nadu: स्टालिन का BJP पर निशाना, कहा- सरकार का निरंकुश व्यवहार स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा देने जैसा

Sat, 30 Jul 2022 04:36 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

स्टालिन ने अपने संबोधन में हाल ही में 27 लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों के निलंबन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सांसदों को भी अभिव्यक्ति के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। संसद में विभिन्न विचारों के टकराव के लिए जगह होनी चाहिए।
 
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तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन - फोटो : ANI
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विस्तार
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डीएमके नेता एवं तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन (MK Stalin) ने शनिवार को  कई मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार (BJP Govt) पर निशाना साधा। केरल के त्रिशूर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने पत्रकारों की गिरफ्तारी और विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर सरकार पर निरंकुश व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार का यह व्यवहार देश के स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा देने जैसा है।

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भाजपा पर साधा निशाना
स्टालिन चेन्नई से केरल के त्रिशूर में "इंडिया @75 मनोरमा न्यूज कॉन्क्लेव 2022" को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक भाषा, एक आस्था और एक संस्कृति को थोपने की कोशिश करने वाले देश के दुश्मन हैं। और देश में ऐसी बुरी ताकतों के लिए कोई जगह नहीं है। इससे पहले स्टालिन ने अपने संबोधन में हाल ही में 27 लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों के निलंबन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सांसदों को भी अभिव्यक्ति के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। संसद में विभिन्न विचारों के टकराव के लिए एक जगह होनी चाहिए।

पिनाराई विजयन की प्रशंसा की
इस दौरान स्टालिन ने अपने केरल के समकक्ष पिनाराई विजयन की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में द्रमुक और माकपा के बीच गठबंधन वैचारिक था न कि केवल चुनावी गठजोड़। कॉन्क्लेव में अपने संबोधन के बाद सवाल उठाते हुए स्टालिन ने पत्रकारों की गिरफ्तारी को निरंकुश व्यवहार करार देते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद बनाए गए संविधान द्वारा प्रदान किए गए अधिकारों को छीनना गलत है। मेरी राय में यह स्वतंत्रता सेनानियों के साथ विश्वासघात है।
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हाल ही में तमिलनाडु और केरल में हिंदी और उसके विरोध में "एक देश, एक भाषा" के मुद्दे पर स्टालिन ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां कई भाषाएं बोली जाती हैं। यहां एक भाषा राष्ट्रभाषा या राजभाषा नहीं बन सकती। अगर ऐसा होता है, तो अन्य भाषाएं धीरे-धीरे नष्ट हो जाएंगी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भी आलोचना की और कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां जनविरोधी हैं।

भाजपा पर राज्यपाल के जरिए सरकार चलाने का आरोप
उन्होंने कहा, "भाजपा अपने राज्यपालों के माध्यम से समानांतर सरकारें चलाने का प्रयास करती है। हमें इन सभी बाधाओं का सामना करते हुए भी अपने राज्यों पर शासन करना है। और हमें लोगों की जरूरतों और अपेक्षाओं को भी पूरा करना है। मैं अभी भी आशान्वित हूं।" 

अपने संबोधन के दौरान स्टालिन ने भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन, गरीबी उन्मूलन और पंचवर्षीय योजनाओं को शुरू करने सहित अन्य पहल के लिए पूर्व प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू की भी प्रशंसा की। स्टालिन ने कहा कि वह एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति थे, उन्होंने लोकतंत्र को महत्व दिया और संघवाद के बारे में बात की।

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