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बिहार की राह पर चला मिजोरम, सत्ता संभालते ही एमएनएफ उठाएगी ये कदम

Wed, 12 Dec 2018 06:04 AM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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mizoram elections
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पूर्व आईपीएस अधिकारी लालदुहोमा की अगुवाई में पहली बार चुनाव मैदान में उतरे सात क्षेत्रीय दलों के गठबंधन जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए आठ सीटें जीत ली हैं। चुनाव आयोग में पंजीकृत नहीं होने की वजह से जेडपीएम के सभी उम्मीदवार निर्दलीय ही मैदान में थे। पार्टी ने 40 में से 39 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। 

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जेडपीएम की अहमियत को ध्यान में रखते हुए ही कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) अपने चुनाव अभियान के दौरान उस पर सीधा हमला करने से बचती रही थी। लालदुहोमा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अंगरक्षक रह चुके हैं।
लालदुहोमा ने अपने तीन दशक के लंबे करियर के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। वे बताते हैं कि इंदिरा गांधी के कहने पर उन्होंने इस्तीफा देकर वर्ष 1984 में कांग्रेस का हाथ थामा था। उस दौरान वे मिजोरम के प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ सांसद भी बने थे। इसके बाद वह बाद लंदन गए और राज्य में शांति बहाली के लिए तत्कालीन उग्रवादी नेता लालदेंगा को भारत ले आए। लेकिन शांति प्रक्रिया में बाधा पहुंचने पर उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया।
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लालदुहोमा ने उसके बाद मिजो नेशनल यूनियन (एमएनयू) का गठन किया था। लेकिन कुछ समय बाद ब्रिगेडियर साइलो की मिजोरम पीपुल्स पार्टी (एमपीपी) में उसका विलय हो गया। साइलो वर्ष 1979 से 1984 तक मिजोरम के मुख्यमंत्री रहे थे।

एमएनएफ विधायक दल के नेता चुने गए जोरमथांगा
 मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के अध्यक्ष जोरमथांगा को पार्टी विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। यहां चुनावी नतीजों के बाद मंगलवार शाम को पार्टी के नए विधायकों की बैठक में उनको आम राय से नेता चुना गया। जोरमथांगा अब राज्यपाल के.राजशेखरन से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इससे पहले मंगलवार दोपहर मुख्यमंत्री ललथहवला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा। एमएनएफ प्रवक्ता ने बताया कि तानलुइया को विधायक दल का उपनेता और लालरुआतकीमा को सचिव चुना गया है। ध्यान रहे कि 40 सदस्यीय विधानसभा में एमएनएफ को 26 सीटें मिली हैं। 

मिजोरम में दोनों सीट  पर हारे मुख्यमंत्री
 मिजोरम के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के उम्मीदवार ललथनहवला विधानसभा चुनाव में अपनी सरचिप और चमफाई दक्षिण सीट हार गए। ललथनहवला को सरचिप सीट पर जोराम पीपुल्स मूवमेंट के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार लालदूहोमा ने 410 मतों के अंतर से हराया।
सीएम को दूसरी सीट चमफाई पर राजनीतिक में कदम रखने वाले मिजो नेशनल फ्रंट के उम्मीदवार टीजे लालनंत्लुअंगा से 1049 मतों से हार गए।

विधानसभा क्षेत्र उम्मीदवार-जीते पार्टी
हाचेक ललरिंदिका राल्ते  कांग्रेस
डंपा ललरिंतलुआंगा सैलो एमएनएफ      
सरलुई ललरिसांगा राल्ते एमएनएफ
तवी आर. ललजिरलियाना एमएनएफ
अइज़ोल उत्तर -1 वनललहलना  जोरम पीपल्स मूवमेंट
अइज़ोल पश्चिम-1 के. संग्थुआमा एमएनएफ
अइज़ोल पूश्चिम-2 ललरुआतकिमा एमएनएफ
अइज़ोल पूश्चिम-3 वीएल जैथानजामा निर्दलीय
 अइज़ोल दक्षिण-1 सी.ललसाबवुंगा  निर्दलीय
अइज़ोल दक्षिण-2 ललछुआनथांगा निर्दलीय
अइज़ोल दक्षिण-3 एफ. ललनुनमाविया एमएनएफ
लांगटेंग एल थंगमाविया एमएनएफ
तुईचंग त्वानलुइया एमएनएफ
चम्फाई उत्तर डॉ. जेआर. थिमासंगा एमएनएफ
चम्फाई-दक्षिण टी जे लालनुनत्लुंगा एमएनएफ
मामित एच ललिजिरलियाना एमएनएफ
कोलासिब के. ललरिनलिआना एमएनएफ
पूर्व तुईपुई रमथनमाविया एमएनएफ
सेरछिप ललडुहोमा निर्दलीय
तुइकुम इंजीनियर ललरिनावमा एमएनएफ
हरंगतुरजो ललचमलियाना  एमएनएफ
दक्षिण तुईपुई डॉ. आर ललथनग्लियाना एमएनएफ
लुंगलेई उत्तर वनललतनपुइया  एमएनएफ
लुंगलेई-पूर्व लॉमावमा तोछवांग एमएनएफ
लुंगलेई-पश्चिम सी ललरिनसंगा एमएनएफ
लुंगलेई-दक्षिण के. पछुंगा एमएनएफ
थोरंग जोडिंगत्लुआंगा राल्ते  कांग्रेस
पश्चिम-तुईपुई निहार कांती चकमा कांग्रेस
तुइचवांग बुद्ध धन चकमा भाजपा
लवंगतलाइ -पश्चिम सी. नगुलियाचुंगा  कांग्रेस
लवंगतलाइ -पूर्व एच. बायजुआ एमएनएफ
सइहा डॉ. के बेछुआ एमएनएफ
पलक केटी रोखाव कांग्रेस

 
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मिजोरम: पहली बार खुला भाजपा का खाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब समेत कई दिग्गज नेताओं की रैलियों को बावजूद इस ईसाई-बहुल राज्य में भाजपा वोटरों का भरोसा हासिल करने में कामयाब नहीं रही। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अपने चुनाव अभियान के दौरान ब्रू और चमका जनजाति-बहुल इलाकों पर खास ध्यान दिया था। तमाम केंद्रीय नेताओं की रैलियां भी इसी लिहाज से रखी गई थीं। सत्ता में आने का सपना देख रही भाजपा का यह मंसूबा तो पूरा नहीं हो सका। लेकिन राज्य में पहली बार उसका खाता जरूर खुल गया।

वैसे, खाता खुलने के बावजूद इसे भाजपा की नहीं बल्कि उसके विजयी उम्मीदवार बुद्ध धन चकमा की निजी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, बुद्ध धन चकमा ललथनहवला सरकार में राज्यमंत्री थे। चुनावों के एलान के बाद उन्होंने सरकार और कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा था। पार्टी ने चकमा को उनकी पारंपरिक सीट टुईच्वांग से मैदान में उतारा था। उन्होंने वहां कांग्रेस के केके टोगेचांग्या को पराजित कर मिजोरम में भाजपा का खाता खोल दिया।
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