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विधानसभा चुनावों के नतीजे बदलेंगे केंद्र की सियासत के समीकरण, यूपीए में भर सकते हैं नई ऊर्जा

Wed, 12 Dec 2018 06:01 AM IST
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
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मंगलवार को आए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने लस्त-पस्त पड़ी कांग्रेस में नई जान डाल दी है। नतीजे ने एकाएक कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) ने नई ऊर्जा भरने की उम्मीद जगाई है। नतीजे आने के बाद सबकी निगाहें अब तक किसी भी कीमत पर भाजपा को सत्ता में आने से रोकने की रणनीति बनाने वाली कांग्रेस के भावी रुख पर होगा। क्या नतीजे आने के बाद कांग्रेस अपने अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष को भाजपा के खिलाफ गोलबंद करने की दिशा में आगे बढ़ेगी? ऐसा हुआ तो कांग्रेस के पुराने रुख से पीएम बनने की महत्वाकांक्षा पालने वाले क्षत्रपों का भावी रुख क्या होगा? 

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दरअसल लोकसभा चुनाव में 44 सीटों पर सिमटने वाली कांग्रेस ने एक-एक कर पार्टी शासित राज्यों को भाजपा के हाथों गंवाने के बाद यूपीए के इतर क्षेत्रीय दलों को वरीयता देने की रणनीति बनाई। कर्नाटक चुनाव के बाद सबसे बड़ी कुर्सी जदएस को हाथ लगने के बाद क्षेत्रीय दलों के नेतृत्वकर्ताओं को लगा कि उनका पीएम बनने का सपना पूरा हो सकता है। यही कारण है कि कर्नाटक के नतीजे आने और कांग्रेस के रुख में परिवर्तन के बाद राकांपा, टीएमसी और टीडीपी के मुखिया क्रमश: शरद पवार, ममता बनर्जी और चंद्रबाबू नायडू भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता के लिए चहल-पहल बढ़ाई। 

नतीजे आने से पहले इन क्षत्रपों के इस बात का अहसास था कि सकारात्मक परिणाम के आने पर कांग्रेस विपक्षी एकता का खुद नेतृत्व करने की पहल भी कर सकती है। यही कारण है कि नायडू, ममता और पवार ने नतीजे आने से पहले इसी माह होने वाली विपक्षी दलों की बैठक टाल दी। यहां तक कि सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र की रणनीति बनाने के लिए आयोजित बैठक से सपा और बसपा ने दूरी बना ली। ऐसे में नतीजे के बाद जहां यूपीए में मजबूती आने के संकेत मिले हैं, वहीं दूसरी ओर क्षत्रपों की ओर से तीसरा मोर्चा बनाने की संभावनाओं को भी बल मिला है। हालांकि दोनों ही स्थिति में केंद्र के सियासी समीकरण में बदलाव आना तय है। 

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