चुनाव के नतीजे साफ दिखा रहे हैं कि मिजोरम की जनता ने कांग्रेस की सरकार को नकार दिया है। कांग्रेस बहुमत हासिल करने में नाकाम रही और इस वजह से नॉर्थ ईस्ट में उसका आखिरी किला भी ढह गया। चुनाव परिणामों में मिजो नेशनल फ्रंट उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करते हुए दिख रही है। कांग्रेस की नजर लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की थी मगर जनता ने उसे नकार दिया।
हार के संभावित कारण
राज्य में दस साल से कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद इन चुनावों में सत्ता विरोधी लहर नहीं देखने को मिली मगर मूलभूत ढांचे का विकास और शराबबंदी का मुद्दा हावी रहा। कांग्रेस के सरकार ने यहां विकास तो किया मगर अर्थव्यवस्था और पलायन के मुद्दे को सुलझाने में वह नाकाम रही। इसके अलावा मिजोरम की खस्ताहाल सड़कों की हालत में भी कांग्रेस सरकार पिछले 10 सालों के कार्यकाल में कोई खास बदलाव नहीं ला सकी।
तीन साल पहले तक मिजोरम में शराबबंदी लागू थी। लेकिन कांग्रेस सरकार ने कानून में संशोधन कर उसे खत्म कर दिया था। मिजोरम में शराब से होने वाली मौतों में लगातार बढ़ोतरी भी कांग्रेस के हार की वजह मानी जा रही है। प्रचार के दौरान भाजपा ने इन मुद्दों का फायदा उठाने का प्रयास किया। हालांकि मिजो नेशनल फ्रंट इसमें सफल रही।
सरकार की नई जमीन नीति पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे मगर इस मुद्दे पर सरकार अपना रुख साफ करने में नाकाम रही। स्पीकर, गृहमंत्री समेत पांच नेताओं का दूसरे दलों में जाना कांग्रेस पार्टी के हार की वजह मानी जा रही है। इन चुनावों में 11000 से ज्यादा ब्रू शरणार्थी के वापसी का मुद्दा भी हावी रहा। त्रिपुरा के गांवों में रह रहे ब्रू शरणार्थियों और महिलाओं के वोट ने भी इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई।
सत्ता की अदला-बदली का इतिहास
बता दें कि नॉर्थ-ईस्ट का यह राज्य 1984 से ही कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट (एमएलएफ) के हाथों में सत्ता बदलता रहा है। इस बीच में 1988 में यहां राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था। यहां कोई भी पार्टी लगातार तीन बार सत्ता में नहीं आई। मिजोरम इकलोता राज्य हैं जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। यहां 3.93 लाख महिला वोटर और 3.74 पुरुष वोटर हैं।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 34 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के खाते में पांच और मिजोरम पीपुल्स कांफ्रेंस की झोली में एक सीट आई थी। इस बार कांग्रेस और मुख्य विपक्षी एमएनएफ ने 40-40 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे जबकि बीजेपी ने 39 सीटों पर ताल ठोकी।
मिजोरम विधानसभा में कुल 40 सीटें हैं, जिनमें से 39 सीटें केवल अनुसूचित जनजाति के लिए रिजर्व हैं. वहीं लोकसभा में पूरे राज्य से केवल 1 सीट है और वह भी ST कैंडिडेट के लिए रिजर्व है।
विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजे
| पार्टी |
सीटें |
| मिजो नेशनल फ्रंट (एमएलएफ) |
26 |
| कांग्रेस |
5 |
| भाजपा |
1 |
| अन्य |
8 |