कांग्रेस को उम्मीद है कि बीते 10 साल में उसकी सरकार से किए गए कार्यों की वजह से लोग अबकी भी उसे ही मौका देंगे। मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ललथनहवला का दावा है कि उनकी सरकार के खिलाफ कोई प्रतिष्ठान-विरोधी लहर नहीं है। दूसरी ओर, एमएनएफ की दलील है कि लोग कांग्रेस के शासन से आजिज आ चुके हैं। उधर, भाजपा का कहना है कि पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद मिजोरम के लोगों ने अब तक सिर्फ कांग्रेस या एमएनएफ का शासन ही देखा है। लेकिन अबकी भाजपा उनको एक और विकल्प दे रही है।
आधा दर्जन क्षेत्रीय संगठनों को लेकर गठित जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम), एनसीपी और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) जैसे दल भी चुनावों में अहम भूमिका निभाने का दावा करते हुए मैदान में हैं। लेकिन वोटरों ने अब तक चुप्पी साध रखी है। ऐसे में सत्ता के तमाम दावेदार असमंजस में हैं।