सैन्य सूत्रों के मुताबिक वॉरगेम मित्र शक्ति का 10वां संस्करण संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर VII के अनुरूप अर्ध-शहरी माहौल में संयुक्त अभियानों पर केंद्रित होगा। संयुक्त अभ्यास 'मित्र शक्ति' का आयोजन हर साल किया जाता है, जिसका उद्देश्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है और दोनों सेनाओं के बीच संबंधों को मजबूत करना है।
भारतीय सेना और श्रीलंकाई सेना 12 अगस्त से श्रीलंका के दक्षिणी प्रांत के मदुरोया में संयुक्त अभ्यास 'मित्र शक्ति' का 10वां संस्करण शुरू करेंगे। भारतीय सेना की ओर से राजपुताना राइफल्स (राज रिफ) की 120 जवानों की एक यूनिट 12 अगस्त को श्रीलंका के लिए रवाना होगी। वहीं श्रीलंकाई सेना की गजाबा रेजिमेंट के भी इतने ही सैनिक इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे। गजाबा रेजिमेंट श्रीलंकाई सेना की एक खास इनफैंट्री रेजिमेंट (पैदल सेना) है।
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सैन्य सूत्रों के मुताबिक वॉरगेम मित्र शक्ति का 10वां संस्करण संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर VII के अनुरूप अर्ध-शहरी माहौल में संयुक्त अभियानों पर केंद्रित होगा। संयुक्त अभ्यास 'मित्र शक्ति' का आयोजन हर साल किया जाता है, जिसका उद्देश्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है और दोनों सेनाओं के बीच संबंधों को मजबूत करना है। अभ्यास के दौरान, दोनों सेनाएं सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए अपने स्किल्स, एक्सपीरियंस और बेस्ट प्रैक्टिस को शेयर को करेंगी। 14 दिवसीय यह अभ्यास 25 अगस्त को समाप्त होगा।
दोनों पड़ोसी देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास का पिछला संस्करण पिछले साल पुणे के औंध में आयोजित किया गया था। पिछली बार, मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट के सैनिकों ने अभ्यास में भाग लिया था। खास बात यह रही थी कि इस अभ्यास में भारतीय वायु सेना के 15 कर्मियों ने भी भाग लिया था।
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अभ्यास के 9वें संस्करण में ड्रोन और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम का प्रयोग किया गया था। दोनों सेनाओं ने आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान हेलीपैड को सुरक्षित करने और हताहतों को निकालने के लिए अभ्यास किया था। सैन्य सूत्रों ने बताया कि ऐसे वॉरगेम्स में बेस्ट प्रैक्टिस शेयर करने से भारतीय सेना और श्रीलंकाई सेना के बीच रक्षा सहयोग का स्तर और बढ़ेगा।