शोध के मुताबिक, एआई के बिना काम करने वालों की तुलना में इसे इस्तेमाल करने वालों के मष्तिष्क की गतिविधियों में तारतम्यता 55 फीसदी घट जाती है। एआई इस्तेमाल करने वालों का दिमाग इस कदर इसका गुलाम बन जाता है कि शायद ही कोई अपनी लिखी एक पंक्ति को सही से याद रख पाए।
अगर आप नई प्रौद्योगिकी संग कदमताल करते हुए एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बहुत ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि इससे आपके दिमाग के काम करने की क्षमता 55 फीसदी तक घट सकती है। एक ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है कि चैटजीपीटी इस्तेमाल करने वाले 83 फीसद लोग कुछ ही मिनटों में यह भूल गए कि उन्होंने क्या लिखा था।
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एआई का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इसके नफा-नुकसान को लेकर समय-समय पर अध्ययन होते रहे हैं, लेकिन मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) का ताजा शोध एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने रखता है। महज चार माह की अवधि में ही शोध में यह बात निकलकर आई कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से हमारे संज्ञानात्मक बोध यानी सोचने-समझने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है। शोध के मुताबिक, एआई के बिना काम करने वालों की तुलना में इसे इस्तेमाल करने वालों के मष्तिष्क की गतिविधियों में तारतम्यता 55 फीसदी घट जाती है। एआई इस्तेमाल करने वालों का दिमाग इस कदर इसका गुलाम बन जाता है कि शायद ही कोई अपनी लिखी एक पंक्ति को सही से याद रख पाए। शोध के दौरान चैटजीपीटी जैसे टूल की मदद न लेने वाले 95 फीसदी लोगों को अच्छी तरह याद था कि उन्होंने क्या लिखा।
न याददाश्त दुरुस्त, न सोच में कोई रचनात्मकता
एमआईटी ने यह शोध विशेष तौर पर चैटजीपीटी इस्तेमाल करने वालों पर किया। बस चार माह में जुटाए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि मष्तिष्क तंत्रिका की गतिविधियां 79 से घटकर 42 हो गईं। दिमाग में संचार की सक्रियता 47 फीसदी घट गई। शोध में पाया गया कि एआई उपयोग करने वालों की याददाश्त पर गहरा प्रतिकूल असर पड़ा और उनकी सोच में रचनात्मकता का स्तर भी नगण्य हो गया।
सोच-समझकर करें इस्तेमाल तो कारगर बनेगी प्रौद्योगिकी
अपना 80% समय स्वतंत्र रूप से सोचने में बिताएं। केवल 20% हिस्सा तथ्यों की जांच या सुधारों के लिए एआई की मदद से पूरा करें। खुद की जांच करें अगर एआई की मदद से कुछ लिखा है तो आउटपुट देखे बिना तुरंत किसी और को यह समझाएं कि इसमें आप क्या कहना चाहते हैं।
गूगल का इस्तेमाल करने वाले रहे कुछ बेहतर
शोध के दौरान कुछ प्रतिभागियों को चैटजीपीटी के बिना कुछ भी लिखने को कहा गया था तो वे एकदम असहाय नजर आए। अध्ययन के मुताबिक, चैटजीपीटी का इस्तेमाल शुरू करने के साथ ही दिमाग की सक्रियता में कमी आने लगती है और कुछ ही हफ्तों में यह प्रौद्योगिकी लोगों के लिए सहायक बनने के बजाय उनकी कमजोरी बन जाती है।
एआई की जगह गूगल का इस्तेमाल फिर भी बहुत ज्यादा बेहतर है। शोध के दौरान गूगल की मदद लेने वाले सिर्फ 11 फीसदी लोग ही यह भूले कि उन्होंने क्या लिखा था।