बीते हफ्ते हुई दो घटनाओं में केरल में भाजपा की मिशन 2026 की तैयारियों की झलक नजर आती है। पांच दिन पहले कांग्रेस के कद्दावर नेता एके एंटनी के राजनीतिक वारिस माने जाने वाले उनके पुत्र अनिल एंटनी ने भाजपा का दामन थामा। इसके ठीक दो दिन बाद ईस्टर के मौके पर प्रधानमंत्री राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े चर्च में से एक सेक्रेट हार्ट कैथोलिक चर्च पहुंचे।
दरअसल, ईसाई समुदाय राज्य में पीएफआई की बढ़ती गतिविधियों और धर्मांतरण मामले में एलडीएफ सरकार की भूमिका से नाराज है। यह समुदाय धर्मांतरण मामले में कांग्रेसनीत यूडीएफ के ढीले ढाले रुख से भी परेशान है। राज्य के चर्च लव जिहाद और धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए लगातार धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग कर रहे हैं। भाजपा इन मुद्दों पर खुल कर चर्च की मांग के साथ है।
एलडीएफ विरोध में कांग्रेस चुप
मुस्लिम मतदाताओं की नाराजगी के डर से चर्च और ईसाई समुदाय की लव जिहाद, धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए कानून की मांग का एलडीएफ विरोधी है, जबकि कांग्रेस ने चुप्पी साध रखी है। ईसाई समुदाय एलडीएफ सरकार पर पीएफआई के प्रति नरम रुख अपनाने का भी आरोप लगाते रहे हैं। बीते चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं ने एलडीएफ का तो ईसाई मतदाताओं ने कांग्रेस का साथ दिया था। अब धर्मांतरण और लव जिहाद मामले में कांग्रेस की चुप्पी से ईसाई समुदाय नाराज हैं।
एंटनी के आने से चेहरे की कमी हुई पूरी
पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि ईसाई समुदाय का भाजपा के प्रति भ्रम धीरे-धीरे दूर हो रहा है। पार्टी के नेता कई स्तर पर चर्च के संपर्क में हैं। धर्मांतरण पर रोक और लव जिहाद संबंधी मांग पर समर्थन व्यक्त करते रहे हैं। इसके अलावा इनकी एक मांग रबर की कीमतों में बढ़ोत्तरी करने की है। इसे भी जल्द पूरा करने की तैयारी है। पार्टी के पास इस समुदाय के एक कद्दावर चेहरे की कमी थी, अनिल एंटनी से यह कमी दूर हो गई है।
चर्च के लिए धर्मांतरण सबसे बड़ा मुद्दा
पूरब की दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कैथोलिक चर्च कहे जाने वाले सीरो मालाबार चर्च ने लव जिहाद को बड़ा खतरा बताते हुए इसे इस्लामिक स्टेट बनाने की साजिश कहा। सरकार को अस्तित्वविहीन बताते हुए चर्च ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में ईसाई लड़कियों को लव जिहाद की जाल में फंसा कर धर्मांतरण के बाद उन्हें सीरिया ले जाया गया। राज्य में गहरी साजिश के तहत ईसाईयों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
ऐसे बदलेंगे समीकरण?
राज्य में मुस्लिमों, ईसाईयों, हिंदुओं की आबादी क्रमश: 26.56 फीसदी, 18.38 फीसदी और 54.73 फीसदी हैं। भाजपा को साल 2014 के लोकसभा, इसके बाद हुए दूसरे लोकसभा, विधानसभा और निकाय चुनावों में 11 फीसदी से 17 फीसदी तक वोट मिले हैं। ये वोट बहुसंख्यक समुदाय के हैं। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर इसमें ईसाई मतदाता जुड़े तो वह राज्य में दूसरी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।