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29 लोगों के संग लापता विमान एएन-32 और 6 सवाल

Sat, 30 Jul 2016 05:31 PM IST
इमरान क़ुरैशी/ बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
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AN-32 - फोटो : bbc
भारतीय वायुसेना के मालवाहक विमान एएन-32 को लापता हुए आठ दिन हो चुके हैं। उसके बाद भी इसके बारे में कुछ पता ना चलने से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। चेन्नई से सिर्फ़ 300 किलोमीटर की दूरी पर ही ये विमान रडार से ग़ायब हो गया। बेहद रहस्मय तरीके से लापता होने की वजह से इसकी तुलना मलेशिया एयरलाइंस के एमएच 70 विमान से की जा रही है। एमएच-70 विमान कुआलालंपुर से बीजिंग जाते समय मार्च 2014 को हिंद महासागर क्षेत्र में लापता हो गया था।

ताम्बरम हवाई अड्डे पर लापता विमान की खोज में लगा भारतीय वायु सेना का विमान।
 
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29 लोगों के संग लापता विमान एएन-32 और 6 सवाल

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AN-32 - फोटो : bbc
1.आखिर क्या हुआ था 22 जुलाई को?
बताया जा रहा है कि चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहे एएन32 विमान ने रोज की तरह ताम्बरम हवाई पट्टी से माल लिया। तब इसमें विमान कर्मचारियों सहित 29 यात्री सवार थे। एएन-32 ने सुबह 8।30 बजे उड़ान भरी। इसे पोर्ट ब्लेयर 11।30 बजे पहुंचना था। लेकिन ठीक आधे घंटे बाद ही 9।00 बजे इसका एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल (एटीसी) से संपर्क टूट गया। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस संबंध में राज्य सभा में जानकारी दी कि, "विमान में संवेदनशील मौसम की जानकारी देने वाली रडार प्रणाली मौजूद थी। विमान चालक ने बिजली और तेज बारिश के कारण विमान को दाहिने ले जाने की अनुमति मांगी लेकिन तुरंत यह बायीं ओर मुड़ गया और 23,000 फ़ीट की ऊंचाई से समुद्र में गिर गया। लेकिन उसके बाद किसी तरह की कोई तत्काल सूचना नहीं मिली। रडार से ओझल होते हुए यह तुरंत लापता हो गया। ये बात सबसे परेशान करने वाली है।" 2014 में लापता हुए मलेशियाई विमान एमएच-70 का अब तक सुराग नहीं मिला है। 
 
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AN-32 - फोटो : AN-32
2. क्या 26 साल पुराना होने की वजह से ये दुर्घटनाग्रस्त हो गया ? आशंका जताई जा रही है कि यह विमान 26 साल पुराना था इस वजह से हो सकता है दुर्घटना का शिकार हो गया हो। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के मुख़्य पायलट और एयर एंड सिस्टम टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (एएसटीई) के कमांडेंट, एयर मार्शल (रिटायर्ड) फिलिप राजकुमार ने इस आशंका से इंकार किया है। फिलिप ने बीबीसी को बताया, "ऐसा नहीं हो सकता। क्योंकि इसे हाल ही में यूक्रेन में अपग्रेड किया गया था। इसके बाद इसे आने वाले 15 सालों तक और आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता था। इसलिए यह और सेवा देने के लायक नहीं था, ऐसा कहना पूरी तरह गलत है।" भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने राज्य सभा में लापता विमान के बारे में जानकारी दी।
 

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AN-32 - फोटो : bbc
3. क्या विमान ऑटोपायलट मोड में था जिससे इसका नियंत्रण बिगड़ने से यह बंगाल की ख़ाड़ी में डूब गया? विमान में गंभीर उथल-पुथल होने की स्थिति में विमान का ऑटोपायलट मोड हट जाता है और यह मैनुअल मोड में आ जाता है। रिटायर एयरमार्शल राजकुमार बताते हैं, ''ऐसा लगता है कि किसी तरह की इमरजेंसी आ गई थी। एक आशंका यह भी हो सकती है कि जब विमान में गंभीर हलचल हो रही थी तो चालक दल किसी तरह के भ्रम का शिकार हो गया हो।’’ मीडिया को जानकारी देते हुए भारतीय तटरक्षक क्षेत्र (पूर्व) कमांडर इंस्पेक्टर जनरल राजन बरगोत्रा। 
 
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AN-32 - फोटो : bbc
4. समुद्र में डूबने के बाद विमान का कोई सुराग क्यों नहीं मिल रहा? इस सवाल का अब तक कोई जवाब नहीं मिला। हालांकि विमान की तलाश में भारतीय सेना, भारतीय कोस्ट गार्ड और भारतीय वायु सेना के 18 जहाज, 16 विमान और यहां तक की एक पनडुब्बी भी लगी हुई है। वे लगभग 505 घंटों से विमान एएन-32 की तलाश में लगे हुए हैं। इस दुर्घटना के पीछे इस इलाके में मानसून के कारण समुद्र का अशांत होना भी एक कारण हो सकता है। लेकिन आश्चर्य तो ये है कि विमान का कोई मलबा अब तक नजर नहीं आया है। लापता विमान के लिए प्रार्थना करते लोग।
 
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AN-32 - फोटो : bbc
5. क्या विमान का बीकन इसलिए काम नहीं कर रहा था क्योंकि विमान काफी पुराना था? जब भी विमान पानी से टकराता है तो इसका इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ईएलटी) या बीकन तुरंत काम करना शुरू कर देता है। यह 30 दिनों तक काम कर सकता है। लेकिन यदि इसकी बैटरी कमजोर हो जाए तो यह धीमा पड़ने लगता है। रक्षा बल की ओर से विमान को खोजने के लिए बहुत सारे संसाधनों को लगाया गया है। इसका एक कारण यह है कि बीकन से मिलने वाले संकेत 20 दिनों बाद कमजोर पड़ने लगते हैं। लेकिन विमान को हाल ही में अपग्रेड किया गया था, इसकी अच्छी तरह से मरम्मत हुई थी इसलिए इस समय बीकन के काम नहीं करने का सवाल ही नहीं उठता। चेन्नई की ताम्बरम हवाई पट्टी जहां से विमान ने माल लिया था।
 
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6. अब तलाशी और बचाव अभियान दल के सामने और क्या विकल्प बचे हैं? विमान की तलाश के लिए ज़मीन और पानी के भीतर जो अभियान चल रहा है, उसका अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है। इतने सारे संसाधनों के बाद विमान को ढूंढ़ने के लिए एक और तरीका अपनाया गया है। विमान को खोजने में अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशियन टेक्नोलॉजी (एनआईओटी) का एक जहाज लगाया गया है। इस जहाज का नाम है, सागर निधि। सागर निधि की खास बात ये है कि इसमें मल्टी-बीम एको साउंडर सिस्टम लगा है जो समुद्र तल में जहाज का पता लगा सकता है और बता सकता है कि वहां क्या है। यह इतना ताकतवर है कि इससे 6,000 मीटर दूर छोटी चीजों का भी पता लगा सकता है। बंगाल की ख़ाड़ी के कुछ हिस्सों की गहराई मात्र दो किलोमीटर ही है। लेकिन एनआईओटी के निदेशक सतीश शिनॉय ने बीबीसी से बात करते हुए आशंका ज़ाहिर की, ''सागर निधि की भी सीमा है। यह खास तरह के छोटे इलाके में ही काम कर सकता है।" सागरनिधि के तीन या चार अगस्त तक तमिलनाडु तट पर आने की संभावना है। इसके अलावा, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) के एक जहाज, समुद्र रत्नाकर को भी मंगलुरू से तमिलनाडु तट पर भेजा जा रहा है।
 
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