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Miss you on Diwali: राकांपा प्रमुख शरद पवार ने 'मां' के लिए लिखा भावनात्मक पत्र

Sat, 14 Nov 2020 05:58 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
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शरद पवार (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने दिवाली के अवसर पर अपनी मां को याद किया है। उन्होंने मां के नाम एक भावनात्मक पत्र लिखते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पवार ने पत्र में लिखा- मिस यू ऑन दिवाली।

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एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने दिवाली के अवसर पर अपनी दिवंगत मां शारदाबाई पवार को याद कर भावुक पत्र लिखा। इसमें महाराष्ट्र की राजनीतिक घटनाओं, बारिश और पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव का जिक्र किया। मराठी भाषा में लिखे इस पत्र को उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट किया है। इसमें शरद पवार ने अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा रखने वाले लोगों के साथ भी अच्छा व्यवहार और स्वस्थ संवाद बनाए रखने की अपनी क्षमता का श्रेय मां शारदाबाई को दिया है। 

 
पवार ने लिखा, ‘‘मैं इस पत्र को लिखने में हुई देरी के लिए क्षमा मांगता हूं। परंतु चुनाव के कारण में मैं पिछले साल बहुत व्यस्त था। संप्रग की लोकसभा चुनाव में हार हुई और कई वरिष्ठ सहयोगियों ने पार्टी छोड़ दी। विधानसभा चुनाव जीतना मेरे लिए बहुत मुश्किल लक्ष्य था।’’
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2019 के विधानसभा चुनाव में दिए भाषणों को याद किया
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने दिवाली के दिन अपनी दिवंगत मां के नाम पत्र लिखा और महाराष्ट्र की राजनीति में कई राजनीतिक घटनाक्रमों खासकर 2019 के विधानसभा चुनाव में बारिश के दौरान भाषण दिए जाने को याद किया।

उन्होंने अपनी मां द्वारा दी गई शिक्षाओं में अटूट विश्वास रखने का उल्लेख करते हुए महाराष्ट्र की राजनीति को याद किया। एनसीपी के प्रमुख और वरिष्ठ नेता ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय पूरे प्रदेश में प्रचार करने के दौरन युवाओं का व्यापक समर्थन मिला जिसने उनका हौसला बढ़ाया।

पवार ने उल्लेख किया, ‘‘मैंने सातारा की एक जनसभा में बारिश का सामना किया। इससे लोग लामबंद हुए और हमें वोट मिला। बाद में नए राजनीतिक समीकरण बने और शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की सरकार बनी।’’

सरकार बनी तो याद आई मां की सलाह
पवार के मुताबिक, जब महाराष्ट्र में नई सरकार की शपथ हो रही थी तो उन्हें उनकी मां की सलाह याद आई जो उन्होंने उनके पहले चुनाव के समय दी थी। उन्होंने कहा, कि मां, आपकी विचारधारा साम्यवाद के लिए आदर्श थी, लेकिन मैं गांधी-नेहरू-यशवंत राव चव्हाण की कांग्रेस की ओर आकर्षित हुआ। आपने अपनी राजनीतिक मान्यता मेरे ऊपर कभी नहीं थोपी। मैंने आपसे सीखा कि भिन्न विचारधारा के लोगों के साथ भी स्वस्थ संवाद रखा जाना चाहिए।

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