अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने दावा किया है कि जामिया मिलिया विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक दर्जा हर हाल में बरकरार रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि घोटाले का घुंघरू पहनकर सत्ता में रहते 10 साल तक भ्रष्टाचार का भांगड़ा करने वाले लोग मुलसमानों को गुमराह करने के लिए अफवाह फैला रहे हैं। नकवी ने कहा कि जहां तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जा का सवाल है तो मामला अदालत में है।
अदालत ही तय करेगी कि केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा हासिल करने के बाद कोई विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक दर्जा कायम रख सकता है या नहीं। नकवी ने इस दौरान मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल में केंद्रीय सेवाओं में मुसलमानों की भागीदारी 6 फीसदी से बढ़कर 8 फीसदी हो जाने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की गरीबी खत्म करने की नीति राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्रनीति है। चूंकि मुसलमानों की बड़ी आबादी गरीबी की शिकार है। ऐसे में इसी समुदाय को सबसे ज्यादा लाभ मिल रहा है।
मंत्रालय की दो साल की उपलब्धियां गिनाते हुए नकवी ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दो साल में विपक्ष खासतौर से कांग्रेस ने असहिष्णुता, अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना बढ़ने जैसे मनगढ़त आरोप लगाए। इन्हीं आरोपों में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को निशाने पर लेने का आरोप लगाया गया। नकवी ने कहा कि देशभर में अल्पसंख्यकों के 15000 से ज्यादा शिक्षण संस्थान हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में मदरसे भी हैं। मोदी सरकार ने इस मामले में अब तक न तो हस्तक्षेप किया है और न ही उसका ऐसा करने का कोई इरादा है।
नकवी ने कहा कि जहां तक सांप्रदायिक दंगों की बात है तो बीते दो साल में इसमें 82 फीसदी कमी आई है। इस साल महज एक सांप्रदायिक घटना हुई है। इसी बीच मुसलमानों की कंद्रीय सेवाओं में भागीदारी बढ़ी है। बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक छात्र संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में सफल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों में पहले ही प्रतिभा थी, मगर कांग्रेस ने इन्हें कभी अवसर नहीं दिया।