स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी भारत को खुले में शौच से मुक्ति (ओडीएफ) से जुड़े नियमों में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने बदलाव किया है। अब ओडीएफ शहर का दर्जा पाने के लिये शहरी निकायों को न सिर्फ पिछले छह साल में शौचालय निर्माण के आंकड़े सार्वजनिक करने होंगे। बल्कि तस्वीरों के साथ सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की जानकारी भी मंत्रालय को देनी होगी। मंत्रालय अधिकारी बताते हैं कि नये नियमों से मिशन में पारदर्शिता आयेगी।
अभी तक ओडीएफ शहर का दर्जा पाने के लिये सरकार ने शर्तें तय कर रखी है। इसके लिये जगह होने पर सभी मकानों पर शौचालय का निर्माण होना चाहिये। जबकि घर में सुविधा न होने की हालत में घर से 500 मीटर के दायरे में इसका निर्र्माण जरूरी है। वहीं, व्यावसायिक इलाकों में एक किमी के भीतर यह सुविधा जरूरी है। इन शर्तों के पूरा होने पर शहरी निकाय खुद ओडीएफ शहर का दावा करता है। फिर, एक स्वंतत्र एजेंसी निगम के आंकड़ों की जांच करता है। इसके बाद शहरी निकाय को ओडीएफ शहर घोषित किया जाता है।
मंत्रालय ने अब शर्तों को कड़ा कर दिया है। अब ओडीएफ शहर का दावा करने वाले निकायों को स्वच्छ भारत मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर 2011 के बाद निजी मकानों में बने शौचालयों का आंकड़ा अपलोड करना होगा। वहीं, चालू हालत के सामुदायिक व सार्वजनिक की तस्वीरें भी वेबसाइट पर डालनी होंगी। इनके निर्माण की भी जानकारी देनी पड़ेगी।
मंत्रालय अधिकारियों ने बताया कि सभी राज्यों के मिशन डायरेक्टर व निकायों को इसकी जानकारी भेज दी गयी है। नये नियम तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गये हैं। अब ओडीएफ शहर की दावों पर आम लोग भी अपनी प्रतिक्रया दे सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी।