रेल मंत्रालय ने आईआरसीटीसी के सभी मोबाइल कैटरिंग अनुबंध रद्द करने का निर्देश जारी किया है। ये सभी कॉन्ट्रैक्ट यात्रियों को बेस किचन में तैयार किया गए खाना उपलब्ध करवाने को लेकर हैं। सफर के दौरान यात्रियों को खाने को लेकर कोई परेशान न हो इसलिए आईआरसीटीसी पहले की तरह रेडी-टू-ईट फूड मुहैया करवाता रहेगा। हालांकि मोबाइल कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट के खत्म होने से आईआरसीटीसी को सालाना 150 करोड़ से ज्यादा का नुकसान भी होने का अनुमान है।
आईआरसीटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला से कहा, कोरोना संक्रमण के चलते पहले से ही देशभर में आईआरसीटी के 40 से ज्यादा बेस किचन पूरी तरह से बंद हैं। सभी बेस किचन में दो हजार से ज्यादा लोग काम करते हैं। यात्रियों को परेशानी न हो इसलिए उन्हें सफर के दौरान रेडी-टू-ईट फूड और चाय, कॉफी, पानी सहित अन्य पेय पदार्थ मुहैया करवाया जा रहा है। आईआरसीटीसी की तरफ से ई-कैंटरिंग की सुविधा भी शुरू की गई है।
उनके मुताबिक रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार मौजूदा 142 मोबाइल कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए हैं। इन कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट के जरिए आईआरसीटीसी को जो लाइसेंस फीस मिलती थी। वह अब हमें नहीं मिलेगी। इससे सालाना करीब 150 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो सकता है। कॉन्ट्रैक्ट लाइसेंस फीस का जो नुकसान होगा उसकी भरपाई आईआरसीटीसी रेडी-टू-ईट फूड और चाय, पानी और पेय पदार्थों की ब्रिकी से कर सकेगा।
इंडियन रेलवे मोबाइल कैटरर्स एसोसिएशन (आईआरएमसीए) की ओर से मद्रास हाई कोर्ट में मोबाइल कैटरिंग के मुद्दे को लेकर बीते वर्ष एक याचिका डाली गई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में आईआरएमसीए की सेवा बहाली की मांगों पर भारतीय रेलवे को विचार करने को कहा था।
अदालत ने अधिकारियों से कहा था, संगठन के सदस्यों को अपनी बातें रखने का पूरा मौका दें और चार सप्ताह के अंदर आदेश जारी करें। रेल मंत्रालय का कहना है कि उसने संगठन की बातों को सुना और टेंडर से जुड़े दस्तावेजों और शर्तों को भी देखा। इस मामले में आईआरएमसीए के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की है। आईआरएमसीए की सेवा मार्च 2020 में घोषित हुए लॉकडाउन के बाद से बंद है।