फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Girl Education: बेटियों को सरकारी, बेटों को पढ़ाते हैं अंग्रेजी स्कूल में, अध्ययन में हुआ खुलासा

Thu, 01 Jun 2023 05:50 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अध्ययन में बेटियों की शिक्षा पर खर्च न करने की सामाजिक कुरीति के बावजूद यह सकारात्मक पहलू भी सामने आया कि तमाम दिक्कतों के बाद भी 10वीं और 12वीं कक्षा में बेटियां उपस्थिति से लेकर पढ़ाई व परिणाम में बेटों से बहुत आगे हैं। 
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Twitter
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश की बेटियों के हर मोर्चे पर परचम लहराने के बावजूद आज भी समाज में दोयम दर्जा बरकरार है। ज्यादातर लोग बेटियों को सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं। वहीं, बेटों के लिए उनकी पसंद अंग्रेजी स्कूल हैं। यह खुलासा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सभी 60 बोर्ड के वर्ष 2022 के नतीजों के अध्ययन में हुआ है। इसमें सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को शामिल किया गया था।
विज्ञापन


अध्ययन में बेटियों की शिक्षा पर खर्च न करने की सामाजिक कुरीति के बावजूद यह सकारात्मक पहलू भी सामने आया कि तमाम दिक्कतों के बाद भी 10वीं और 12वीं कक्षा में बेटियां उपस्थिति से लेकर पढ़ाई व परिणाम में बेटों से बहुत आगे हैं। अध्ययन में पता चला है कि सरकारी स्कूलों में 10वीं कक्षा में एक फीसदी छात्राें की तुलना में बेटियों की संख्या 1.02 फीसदी है। जबकि, रिजल्ट में लड़कों का प्रदर्शन 76.2 फीसदी है, तो बेटियों का 80 फीसदी। सहायताप्राप्त स्कूलों में एक फीसदी लड़कों की तुलना में बेटियों की संख्या 0.89 फीसदी है। वहीं, अंग्रेजी निजी स्कूलों में एक फीसदी लड़कों की तुलना में बेटियों की संख्या 0.87 फीसदी और परीक्षा में शामिल होने का आंकड़ा 0.88 फीसदी है। इसके बावजूद रिजल्ट में लड़कों का पास प्रतिशत 82.1 रहा, तो बेटियों का प्रदर्शन 86.1 फीसदी है।

12वीं कक्षा में बेटियों से अधिक भेदभाव
अध्ययन में 12वीं कक्षा में भेदभाव अधिक दिखा। सरकारी स्कूलों में एक फीसदी लड़कों की तुलना में बेटियों की संख्या 1.07 फीसदी है। जबकि रिजल्ट में लड़कों का 81.8 फीसदी तो बेटियों का प्रदर्शन 87.2 फीसदी है। वहीं, निजी अंग्रेजी स्कूलों में रिजल्ट में लड़कों का 83.5% तो बेटियों का प्रदर्शन 90.1% है।
विज्ञापन


बेटियों की पहली पसंद कला संकाय
11वीं से स्नातक तक बेटियों की पहली पसंद कला संकाय है। जहां 35 फीसदी लड़के आर्ट्स की पढ़ाई करते हैं, उसके मुकाबले बेटियों का आंकड़ा 46 फीसदी है। 46 फीसदी लड़के विज्ञान लेते हैं तो 38 फीसदी बेटियां। वहीं, 15 फीसदी लड़के व 14 फीसदी लड़कियां वाणिज्य विषयों की पढ़ाई करना चाहती हैं।

एससी वर्ग में 52.5 फीसदी बेटियां कला संकाय में लेती हैं दाखिला
देश में अनुसूचित जाति वर्ग में 52.5 फीसदी बेटियां और 43.8 फीसदी बेटे कला संकाय में दाखिला लेते हैं। वहीं अनुसूचित जनजाति वर्ग में 55.6 फीसदी लड़के और 58.9 फीसदी लड़कियां कला संकाय की पढ़ाई करती हैं। साइंस स्ट्रीम में एसटी वर्ग के लड़कों का आंकड़ा 40.6 फीसदी तो लड़कियों का आंकड़ा महज 33 फीसदी है। जबकि एसटी वर्ग में लड़कों का यही आंकड़ा 31 फीसदी तो लड़कियों का 29 फीसदी है। केंद्र सरकार के स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बताया कि इसी के तहत शिक्षा मंत्रालय ने केंद्र और राज्यों के 60 नियमित व ओपन स्कूल बोर्ड की वर्ष 2022 के रिजल्ट का अध्ययन किया है। इसका मकसद स्कूली शिक्षा की कमियों में सुधार लाना है। हालांकि बेटों और बेटियों की शिक्षा में भेदभाव को पूरी तरह नहीं माना जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें