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CoE-SURVEI: 'देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए फुलप्रूफ लैंड मैनेजमेंट जरूरी', राजनाथ सिंह की अपील

Thu, 04 Aug 2022 10:20 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजनाथ सिंह ने कहा कि विश्व की जनसंख्या बढ़ रही है और ऐसे में संसाधनों की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में भूमि जैसे अनुपयोगी संसाधनों के प्रभावी और विवेकपूर्ण प्रबंधन की आवश्यकता जरूरी है। उन्होंने सभी हितधारकों से भूमि के सर्वेक्षण और विश्लेषण में प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : ट्विटर/रक्षा मंत्री कार्यालय
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विस्तार
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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत को अगर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है तो इसके लिए फुलप्रूफ लैंड मैनेजमेंट जरूरी है। उन्होंने अधिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाने के लिए डीजीडीई को प्रोत्साहित भी किया। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार के विभागों से भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के लिए भूमि का पूर्ण प्रबंधन सुनिश्चित करने का आह्वान किया। 

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उन्होंने ये बातें प्रभावी भूमि प्रबंधन विषय पर आयोजित एक वेबिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही। इस वेबिनार का उद्देश्य भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित अनुप्रयोगों का प्रसार करना था, जिसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सैटेलाइट एंड अनमैन्ड रिमोट व्हीकल इनिशिएटिव (सीओई-सर्वे) द्वारा विकसित किया गया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के सहयोग से सीओई-सर्वे हमारे देश की भूमि सर्वेक्षण, विश्लेषण और प्रबंधन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए वन-स्टॉप सेंटर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीओई-सर्वे में भूमि में परिवर्तन का पता लगाने, भूमि उपयोग विश्लेषण और 3 डी इमेजरी विश्लेषण शामिल हैं। 

अपने संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि विश्व की जनसंख्या बढ़ रही है और ऐसे में संसाधनों की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में भूमि जैसे अनुपयोगी संसाधनों के प्रभावी और विवेकपूर्ण प्रबंधन की आवश्यकता जरूरी है। उन्होंने सभी हितधारकों से भूमि के सर्वेक्षण और विश्लेषण में प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया।
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अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने भूमि विवाद जैसे विभिन्न मुद्दों को हल करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भूमि विवाद जैसे मुद्दे विकास प्रक्रिया में बाधा बन जाते हैं। हमारी सरकार ने भूमि से संबंधित कई अप्रासंगिक पुराने कानूनों को निरस्त कर दिया है। आज भारत उन देशों में से एक है जहां गांवों में भी ड्रोन की मदद से जमीन का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP-MIS 2.0) के अनुसार, लगभग 94 प्रतिशत गांवों के भूमि रिकॉर्ड को कम्प्यूटरीकृत कर दिया गया है। 

स्पष्ट भूमि स्वामित्व के महत्व को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इससे केवल निवासियों को ही सुविधा नहीं मिलेगी बल्कि नए सेट-अप स्थापित करने में उद्योगों के लिए भी सुविधा होगी। इस दौरान राजनाथ सिंह ने छावनी बोर्डों के विकास और इसके निवासियों के जीवन को आसान बनाने के लिए डीजीडीई के ऐसे अन्य प्रयासों की भी सराहना की। इन प्रयासों में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए करीब 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि का सर्वेक्षण और सीओई-सर्वेई की स्थापना के अलावा 'ई-छवानी' पोर्टल का शुभारंभ शामिल है। उन्होंने डीजीडीई से रक्षा मंत्रालय के सहयोग से ऐसे और सुधार लाने का आह्वान किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग से डीजीडीई के कामकाज में अधिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी। 

गौरतलब है कि सीओई-सर्वे की को रक्षा संपदा महानिदेशालय (DGDE) द्वारा भूमि सर्वेक्षण, डेटा के विश्लेषण और भूमि प्रबंधन में उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया गया है। पिछले कुछ महीनों में केंद्र सरकार ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, विशाखापत्तनम के सहयोग से कई सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं।

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