तीन विवादित कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए मोइत्रा ने कहा था कि सरकार कृषि कानून लाई जबकि विपक्ष और किसान संगठन इन्हें किसान विरोधी बता रहे थे। उन्होंने कहा था कि इन्हें बिना आम-सहमति और बिना समीक्षा किए लाया गया तथा बहुमत के बल पर लाया गया। तृणमूल कांग्रेस सांसद ने कहा था कि वह केंद्र में सत्तारूढ पार्टी से पूछना चाहती हैं कि क्या इस तरह से लोकतंत्र चलेगा, क्या एक पार्टी का शासन देश में चलेगा।
संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई और कहा कि इस प्रकार का उल्लेख नहीं किया जा सकता। वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने नियमों का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति व्यक्त की। इस पर पीठासीन सभापति एन के प्रेमचंद्रन ने कहा था कि अगर महुआ मोइत्रा की बात में कुछ आपत्तिजनक पाया जाता है, तो उसे रिकॉर्ड में नहीं रखा जाएगा।