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महाराष्ट्रः मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा बोले- प्राइवेट प्लेसमेंट विधेयक से रोजगार के नाम पर नहीं हो सकेगी ठगी

Sat, 12 Apr 2025 11:04 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

राज्य के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने बताया कि महायुती सरकार राज्य के प्रत्येक युवा को सुरक्षित रोजगार दिलाने की दिशा में कार्य कर रही है। प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से युवाओं को ठगे जाने की बढ़ती घटनाओं पर नकेल कसने के लिए बीते महीने बजट सत्र में महाराष्ट्र निजी प्लेसमेंट एजेंसियों (विनियमन) विधेयक में कड़े प्रावधान किये गये हैं।
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कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा - फोटो : एक्स-@MPLodha
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विस्तार
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महाराष्ट्र में युवाओं के रोजगार में अब निजी प्लेसमेंट एजेंसियां मनमानी नहीं कर सकेगी। राज्य विधानमंडल के बजट सत्र में महाराष्ट्र प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसियों (विनियमन) विधेयक, 2025 मंजूर किया गया है। इस विधेयक के पारित होने से अब युवाओं के साथ रोजगार के नाम पर ठगी नहीं हो सकेगी। राज्य के कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने शनिवार को यह जानकारी दी।
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राज्य के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने बताया कि महायुती सरकार राज्य के प्रत्येक युवा को सुरक्षित रोजगार दिलाने की दिशा में कार्य कर रही है। प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से युवाओं को ठगे जाने की बढ़ती घटनाओं पर नकेल कसने के लिए बीते महीने बजट सत्र में महाराष्ट्र निजी प्लेसमेंट एजेंसियों (विनियमन) विधेयक में कड़े प्रावधान किये गये हैं। यदि अब कोई प्लेसमेंट एजेंसी किसी युवक के साथ धोखाधड़ी करती है या फिर झूठे वादे करती है और दोषी पाई जाती है तो उसके खिलाफ 50 हजार से तीन लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। तीन वर्ष के कारावास की सजा हो सकती है। इसके साथ ही उसका रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया जायेगा। लोढ़ा ने बताया कि अब प्राइवेट प्लेसमेंट एजेंसियों हर पांच साल में अपने रजिस्ट्रेशन का नूतनीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

वर्ष 2028 तक राज्य की अर्थव्यवस्था एक ट्रिलियन डॉलर बनाने का लक्ष्य
मंत्री लोढ़ा ने कहा कि महाराष्ट्र भारत की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद में 14 प्रतिशत यानी 35.27 लाख करोड़ रुपये का योगदान देता है। राज्य की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2028 तक एक ट्रिलियन डॉलर बनाने के लक्ष्य के तहत काम हो रहा है। इसके लिए कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार विभाग करीब 1500 से अधिक उद्योगों और 2 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को जोड़कर कौशल आवश्यकता विश्लेषण सर्वेक्षण (एमएसएनएएस) किया है। महाराष्ट्र न केवल कौशल अंतर को पाटने की कोशिश में है बल्कि के उद्योगों की नींव को भी मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
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