भारत के पूर्वोत्तर और बांग्लादेश के बीच घनिष्ठ संबंधों पर जोर देते हुए मंत्री जी किशन रेड्डी ने मंगलवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पारस्परिक लाभ के लिए एक्ट ईस्ट नीति को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। तीसरे भारत-जापान बौद्धिक सम्मेलन के दौरान रेड्डी ने कहा, बंगाल की खाड़ी पूर्वोत्तर के बहुत करीब है और इस क्षेत्र के विकास के लिए इसके निकटवर्ती पड़ोसी बांग्लादेश से सहयोग की आवश्यकता है।
कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए मोदी सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए रेड्डी ने उल्लेख किया कि इस क्षेत्र में हवाई अड्डों की संख्या 2014 में नौ थी, जबिक 2023 में 17 हो गई है। क्षेत्र के विकास के लिए 5 लाख करोड़ रुपये और सड़क निर्माण्र पर एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। पिछले नौ सालों में रेलवे कनेक्टिविटी पर 77,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
रेड्डी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश में एक जीवंत गांव परियोजना का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार ने इस साल तक सभी अलग-थलग और हिमालयी क्षेत्रों को दूरसंचार से कवर करने का लक्ष्य रखा है। चटगांव और मोंगला बंदरगाहों के उपयोग से बांग्लादेश के साथ संपर्क और मजबूत होगा। हमें दोनों पक्षों के पारस्परिक लाभ के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। रेड्डी ने न केवल पूर्वोत्तर बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण विकास भागीदार होने के लिए जापान का धन्यवाद दिया।
बांग्लादेश के मंत्री ने भारत को बताया करीबी दोस्त
बांग्लादेश के विदेश मामलों के मंत्री (राज्य) शहरयार आलम ने कहा कि भारत हमारा सबसे करीबी दोस्त है और ढाका अपने पड़ोसियों के साथ व्यापार के लिए तैयार है। आलम ने बढ़ते व्यापार और व्यापार पर चर्चा के लिए ढाका में सभी पूर्वोत्तर राज्यों के मंत्रियों की एक दिवसीय बैठक करने का भी प्रस्ताव दिया।
जापान और बांग्लादेश आपसी लाभ के लिए मिलकर कर रहे हैं काम
भारत में जापान के राजदूत हिरोशी सुजुकी ने बंगाल की खाड़ी में व्यापार और व्यवसाय की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, जापान और बांग्लादेश आपसी लाभ के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और वहां 338 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं। बांग्लादेश में 7 फीसदी की वृद्धि अभूतपूर्व है और इसका भविष्य अच्छा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश 2027 में माताबारी गहरे समुद्री बंदरगाह के आने से, पूर्वोत्तर भारत पूरे विश्व के लिए खुल जाएगा। वे दिन दूर नहीं जब बंगाल की खाड़ी एक नया औद्योगिक केंद्र होगा और जापान बांग्लादेश में काम करने में बहुत रुचि रखता है।