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Monsoon Session: ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की मांग पर रिजिजू बोले-हर सत्र खास होता है

Thu, 05 Jun 2025 11:07 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

 केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की विपक्ष की मांग के बीच बृहस्पतिवार को कहा कि संसद का हर सत्र "विशेष" होता है।
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किरेन रिजिजू, केंद्रीय मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद का हर सत्र खास होता है। उन्होंने यह टिप्पणी विपक्ष के ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की मांग के बीच की। मानसून सत्र बुलाने की जल्दबाजी पर सवाल उठाए जाने पर उन्होंने कहा कि संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति ने राष्ट्रपति से 21 जुलाई से 12 अगस्त तक सत्र बुलाने की सिफारिश की है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की विपक्ष की मांग के बीच गुरुवार को कहा कि संसद का हर सत्र "विशेष" होता है।
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लेकिन सत्र बुलाए जाने की तारीख उस दिन से गिनी जाएगी जिस दिन राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को बुलाने के लिए आदेश जारी करेंगी। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार सत्र के दौरान सभी मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार ने पहलगाम हमले और आतंकवादियों को न्याय के कटघरे में लाने में केंद्र की विफलता पर चर्चा के लिए तत्काल विशेष सत्र बुलाने की ‘इंडिया’ गठबंधन की मांग से बचने के लिए 47 दिन पहले ही संसद के मानसून सत्र की शुरुआत की घोषणा की है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाअभियोग प्रस्ताव लाए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सभी राजनीतिक दलों से संपर्क कर रही है और चाहती है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के संवेदनशील मुद्दे पर सभी की सहमति हो। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का मुद्दा किसी विशेष राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं है तथा सभी को इस पर एकमत होना चाहिए, क्योंकि न्यायाधीश पर महाभियोग चलाना संसद को उपलब्ध अधिकार है।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार सत्र के दौरान सभी मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहते हुए मार्च में राष्ट्रीय राजधानी में न्यायमूर्ति वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना हुई थी, इस दौरान उनके आवास से नकदी से भरी कई जली हुई बोरियां मिली थीं।

समझा जाता है कि भारत के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा था, लेकिन न्यायमूर्ति वर्मा ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उनका इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरण कर दिया, जहां उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया है। न्यायमूर्ति खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महाभियोग प्रस्ताव की सिफारिश की थी, जो उच्च न्यायपालिका के सदस्यों को सेवा से हटाने की प्रक्रिया है।
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