डीएमके महासचिव और तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन और उनके परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला 2011 में सामने आया था। 2017 में वेल्लोर की एक विशेष अदालत ने उन्हें आरोप मुक्त कर दिया था। अब मद्रास हाईकोर्ट ने मंत्री के खिलाफ दोबारा आरोप तय करने का आदेश दिया है।
तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री दुरई मुरुगन की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ रही हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक विशेष अदालत को आय से अधिक संपत्ति के मामले में मंत्री मुरुगन और उनकी पत्नी के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। मद्रास हाईकोर्ट ने निचली अदालत के मुरुगन को बरी करने के फैसले को पलट दिया।
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गुरुवार को जस्टिस पी. वेलमुरुगन ने वेल्लोर की एक विशेष अदालत को दुरईमुरुगन और उनकी पत्नी के खिलाफ 2007-09 की अवधि के दौरान आय के ज्ञात स्रोतों से 1.40 करोड़ रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में आरोप तय करने का निर्देश दिया। 2006-11 की डीएमके सरकार में उनके पास लोक निर्माण विभाग का प्रभार था।
इससे पहले बुधवार को भी न्यायाधीश पी वेलमुरुगन ने वेल्लोर जिले की अदालत को निर्देश दिया था कि वह डीएमके महासचिव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में अलग-अलग जांच अवधि (1996-2001) के साथ कानून के अनुसार आरोप तय करे।
यह है मामला
डीएमके महासचिव और तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन और उनके परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला 2011 में सामने आया था। सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) ने दायर याचिका में कहा था कि जब दुरईमुरुगन 1996 से 2001 तक तमिलनाडु के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री थे, उस दौरान उन्होंने 3.92 करोड़ रुपये की संपत्ति अपने, अपने बेटे और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर अर्जित की। यह संपत्ति उनकी आय से कहीं ज्यादा बताई गई है।
2017 में वेल्लोर की एक विशेष अदालत ने दंपती को बरी कर दिया था। डीवीएसी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर न्यायाधीश ने विशेष अदालत को निर्देश दिया कि मामले में फिर से आरोप तय किए जाएं और छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी की जाए। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि मामला काफी पुराना है, इसलिए दिन-प्रतिदिन सुनवाई कर इसे जल्द निपटाया जाए।