राजधानी में मजदूरों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने के लिए एक कमेटी गठित करने के दिल्ली सरकार के एक नोटीफिकेशन को हाईकोर्ट ने रद्द घोषित कर दिया है। कोर्ट के फैसले से असहमत दिल्ली सरकार के श्रममंत्री गोपाल राय ने रविवार को कहा कि वे फैसले का अध्ययन कर रहे हैं। अध्ययन के बाद ही वे इस मामले पर कोई कानूनी कदम उठाने संबंधित फैसला लेंगे। सोमवार को श्रम विभाग इस विषय पर एक बैठक भी करने जा रहा है। बैठक में इस मुद्दे पर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं।
गोपाल राय ने कहा कि इस मसले पर लगभग एक साल की सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस फैसले को 'जल्दी में लिया गया' बताया है। यह बेहद निराशाजनक है, क्योंकि इस फैसले तक पहुंचने के लिए सरकार ने छ: माह का समय लिया था और सात बैठकें की थीं। इस मसले से जुड़े सभी पक्षों से विचार विमर्श भी किया गया था।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के न्यूनतम वेतन के मामले पर पहले ही बहुत देरी हो चुकी है। पहले दिल्ली के उपराज्यपाल के कारण और फिर बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय के कारण इस मामले में बहुत देरी हो चुकी है।
वे इस मामले को अब लंबा नहीं खिंचने देना चाहते और इसलिए इस मुद्दे से जुड़ा कोई भी फैसला तत्काल करने की कोशिश करेंगे। दिल्ली सरकार सभी मजदूरों की जिंदगी में खुशहाली लाने के लिए सभी संभव उपाय करेगी।