खाते में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर जुर्माना लगाने के लिए आलोचना झेल रहे भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने बुधवार को अपने इस कदम के लिए प्रधानमंत्री के प्रिय जन धन खातों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि विशाल संख्या में जन धन खातों के प्रबंधन के बोझ को संतुलित करने के लिए कुछ शुल्क लगाना जरूरी है।
बैंक ने यह भी कहा कि जुर्माने पर पुनर्विचार करने के लिए सरकार की तरफ से कोई औपचारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है और यदि कुछ कहा जाएगा, तो उस पर विचार किया जाएगा। बैंक ने साथ ही कहा कि शुल्क जन धन खातों पर नहीं लगेगा। उल्लेखनीय है कि एसबीआई ने खातों में न्यूनतम बैलेंस नहीं होने पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है। बैंक ने विभिन्न बैंकिंग सेवाओं पर शुल्कों में भी संशोधन किया है। नए शुल्क एक अप्रैल से प्रभावी होंगे। बैंक के इस कदम की चारो ओर आलोचना हो रही है।
एसबीआई की चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य ने यहां महिला उद्यमियों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन के इतर संवाददाताओं से कहा कि हमारे पास 11 करोड़ जन धन खाते हैं। इतनी विशाल संख्या में जन धन खातों का संचालन करने के लिए हमें कुछ शुल्क लगाने की जरूरत है।
फैसले पर पुनर्विचार के लिए सरकार की ओर से निर्देश मिलने के सवाल पर एसबीआई के प्रबंध निदेशक (नेशनल बैंकिंग) रजनीश कुमार ने कहा कि इस विचार पर कोई औपचारिक निर्देश नहीं मिला है। यदि कुछ निर्देश मिलेगा तो हम विचार करेंगे।